प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री और जिला मंत्री रमापति राम शास्त्री
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के विकास के लिए करीब साढ़े चार सौ योजनाएं संचालित की जा रही हैं, सिर्फ गोरखपुर में ही विकास की ढाई सौ से अधिक योजना, परियोजनाएं चलाई गईं हैं। जनपद में साढ़े चार वर्ष में करीब 15 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य किए गए हैं। प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री और जिला मंत्री रमापति राम शास्त्री ने यह जानकारी प्रेस वार्ता के दौरान दी।
सर्किट हाउस में रविवार को जिला प्रभारी मंत्री रमापति शास्त्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साढ़े चार साल के कार्यकाल को रामराज्य का प्रतिरूप बताते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में भी किसी को दैहिक, दैविक, भौतिक ताप नहीं हुआ, सब परस्पर प्रीति के साथ स्वधर्म का पालन करते हुए रह रहे हैं। आजादी के बाद प्रदेश मेें बीते साढ़े चार वर्ष में जितना विकास हुआ है वह और कभी नहीं हुआ। गोरखपुर को फर्टिलाइजर कारखाना, पिपराइच चीनी मिल, एम्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान, निजी विश्वविद्यालय आदि का लाभ दिया।
बाढ़ जैसी आपदा का प्रबंधन जितनी बेहतर ढंग से मुख्यमंत्री योगी के कार्यकाल में किया जा रहा है वह अभूतपूर्व है। पहले की सरकारें बाढ़ पीड़ितों को मुट्ठीभर चना-चबेना देती थीं, हमारी सरकार में इतना खाद्यान्न दिया जा रहा है कि लाभार्थी को लादने के लिए रिक्शा करना पड़ रहा है। बहुत से विकास कार्य अभी भी चल रहे हैं, जनपद में करीब तीन सौ विकास कार्य दिसंबर तक पूर्ण होने की आशा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के साथ ही जनपद का सर्वांगीण विकास कर रहे हैं। प्रेस वार्ता में उनके साथ क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता, क्षेत्रीय मंत्री जनार्दन तिवारी, जिला प्रभारी अजय गौतम और अच्युतानंद शाही मौजूद रहे।
समाज कल्याण मंत्री से मिले छात्रवृत्ति से वंचित विद्यार्थी
दशमोत्तर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित महाराणा प्रताप महाविद्यालय के विद्यार्थी रविवार को समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री से सर्किट हाउस में मिले। विद्यार्थियों ने मंत्री से छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिलाने की मांग की। मंत्री रमापति शास्त्री ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को छात्रों की समस्या दूर करने का निर्देश दिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह ने बताया कि छात्रों की समस्या का निराकरण शासन की गाइडलाइन के अनुसार किया जाएगा।