मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीके सिंह ने बताया कि लंपी बीमारी की रोकथाम पर शोध कर वैक्सीन का फार्मूला खोजने वाले अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के डॉ. नवीन कुमार व डॉ संजय बरुआ भी गोरखपुर आए थे और उन लोगों ने कई गायों का परीक्षण किया।
गायों को पहले गोट पाॅक्स वैक्सीन लगी थी, लेकिन वह प्रभावी नहीं होने के चलते गायें संक्रमित हो गई थीं। संक्रमित गायों को पहले से ही अलग रखा था, उनके समेत अन्य सभी गायों को अब लंपी प्रोवैक आईएनडी वैक्सीन लगाई गई है, सभी गायें स्वस्थ हैं। वैक्सीन लगने के बाद गोरखनाथ गोशाला में कोई नया मामला नहीं आया है।
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वैक्सीन से 7 दिन के अंदर विकसित होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि लंपी बीमारी मच्छर-मक्खी के चलते तेजी से फैलती है। इस संक्रामक बीमारी की रोकथाम के लिए बनी वैक्सीन लंपी प्रोवैक आईएनडी पूर्णत: स्वदेशी है और अब तक इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। स्वस्थ पशु को वैक्सीन लगने पर सात से 10 दिन के अंदर उसके भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता बनने लगती है। 14 दिन में पशु पूरी तरह से सुरक्षित हो जाता है। एक साल तक इसका प्रभाव बना रहता है।
- लंपी वायरस से संक्रमित पशु को हल्का बुखार रहता है।
- मुंह से लार अधिक निकलती है और आंख-नाक से पानी बहता है।
- पूरे शरीर पर छोटी-छोटी गांठें उभर आती हैं।
- बीमारी गंभीर होने पर गांठों से खून बहने लगता है।
- संक्रमित पशु के दूध उत्पादन में गिरावट आ जाती है।
- पशु में गर्भपात का खतरा रहता है और कभी-कभी पशु की मौत भी हो जाती है।
- संक्रमण के लक्षण दिखते ही अन्य पशुओं को अलग कर दें।
- पशुशाला की नियमित सफाई करें और चूने या किसी अन्य कीटनाशक का छिड़काव करें।
- संक्रमित पशु की विशेष देखरेख करें, उसके चारा-पानी का विशेष ख्याल रखें।
- पशुओं को लंपी से बचाने वाली वैक्सीन लगवाएं।
- यह एक संक्रामक बीमारी है, इसलिए पशुओं को खुला न छोड़ें और लावारिश घूम रहे पशुओं पर भी निगरानी रखें।
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गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी ने कहा कि गोरखनाथ गोशाला की 49 गायों में लंपी रोग हो गया था। डाक्टरों ने बताया तो संक्रमित गायों को अलग रखकर उनका इलाज किया गया। वैक्सीन लगने के बाद सभी गायें पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार ने कहा कि बरसात के दिनों में मच्छर-मक्खी काटने से यह बीमारी तेजी से फैलती है। इसलिए बरसात में पशुशाला की सफाई का विशेष ध्यान रखें। बीमार पशु को मच्छरदानी से कवर करें। पशुपालन विभाग से संपर्क कर पशुओं का टीकाकरण कराएं और उनके चारा-पानी का भी खास ध्यान रखें।