बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी। फाइल फोटो
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बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी के खिलाफ बैंक ऑफ इंडिया से 754.25 रुपये की धोखाधड़ी के दर्ज मामले मेें अज्ञात सरकारी कर्मचारी और अज्ञात लोगों को भी मुकदमे का हिस्सा बनाया गया है। इसका मतलब है कि सीबीआई की जांच का दायरा बढ़ेगा। इसकी जद में मनमाने ढंग से ऋण देने वाले बैंक अफसर और कर्मचारी भी आएंगे। विधायक के सगे-संबंधियों तक भी जांच की आंच पहुंच सकती है।
सीबीआई ने जो मुकदमा दर्ज किया है उसके मुताबिक बैंक ऑफ इंडिया स्टार हाउस विभूति खंड के जोनल मैनेजर यादवेंद्र नारायण द्विवेदी ने लिखित शिकायत की थी। जोनल मैनेजर के आरोप थे कि वर्ष 2012 से 2016 के बीच बैंक ऋण लिया गया, लेकिन चुकाया नहीं गया। इससे बैंक ऑफ इंडिया को 754.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
जोनल मैनेजर की लिखित शिकायत में ही मैसर्स गंगोत्री एंटरप्राइजेज, अजित पांडेय, विनय शंकर तिवारी, रीता तिवारी और रॉयल इंपायर मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड का नाम था। अज्ञात सरकारी कर्मचारी व अज्ञात व्यक्ति का भी जिक्र है। इसी आधार पर सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर जांच-पड़ताल शुरू की है।
सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक जल्द ही समन जारी करके आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। जिस समयावधि में ऋण बांटा गया है, उस दौरान तैनात बैंक अफसर व कर्मचारियों से भी पूछताछ होगी। बैंक ऋण के लिए जमा कराए गए दस्तावेजों की गहनता से छानबीन की जाएगी। जो अफसर या कर्मचारी दोषी मिलेंगे, उनके नाम एफआईआर में बढ़ाकर विवेचना आगे बढ़ाई जाएगी।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
आईपीसी की धारा 120 बी, 420, 468, 471 और पीसी एक्ट-1988 की धारा 13(2) आर/डब्लू 13 (1) डी।
जहां से लिया जाता है लोन वहीं दर्ज होता है मुकदमा
कोई भी बैंक किसी भी कंपनी या फर्म को तीन आधार पर लोन देता है। पहला, लोन उस इलाके में स्वीकृति किया जाता है, जहां उस कंपनी का कारपोरेट ऑफिस हो। दूसरा, जहां कंपनी की गतिविधियां संचालित हो रही हैं और तीसरा, जहां कंपनी या फर्म के प्रोपराइटर का मूल निवास हो। इसी तरह छोटे लोन बैंक की शाखाओं से स्वीकृत कर दिए जाते हैं, लेकिन क्षेत्रीय प्रबंधक या उप महाप्रबंधक स्तर से पांच करोड़ तक का लोन स्वीकृत किया जा सकता है।
उससे ज्यादा या कारपोरेट लोन के लिए बैंक बोर्ड के अधिकारियों की स्वीकृति जरूरी होती है। कारपोरेट ऑफिस भी दिल्ली या लखनऊ में होने के कारण लोन की स्वीकृति वहीं की शाखाओं से की गई। लिहाजा मुकदमा भी वहीं दर्ज किया गया। गोरखपुर से कोई बड़ा लोन मैसर्स गंगोत्री एंटरप्राइजेज या फिर दूसरी फर्मों को नहीं दिया गया है।