बांसगांव में बच्चे की हत्या हो या फिर चिलुआताल से बच्चे के अपहरण की घटना, सब मामले पुलिस की फाइलों में धूल फांक रहे हैं। पुलिस आज तक पर्दाफाश नहीं कर सकी। पुलिस का यह हाल तब है, जब एडीजी, डीआईजी और एसएसपी स्तर के अफसर क्राइम मीटिंग में समीक्षा भी करते हैं। आज भी पुरानी घटनाओं के वादी (पीड़ित) अफसरों के यहां प्रार्थनापत्र लेकर गुहार लगाते देखे जा सकते हैं।
कैंट इलाके में घर में घुसकर हुई हत्या में कार्रवाई का मामला तीन साल से लंबित हैं। इस दौरान कई अफसर बदल गए, आश्वासन के साथ फाइल इधर से उधर जांच के नाम पर घूमती रही, लेकिन न्याय आज तक नहीं मिला।
इसी तरह बांसगांव इलाके में बच्चे की हत्या का भी पर्दाफाश नहीं हो सका है। घरवाले फरियाद लिए सीएम तक भी जा चुके हैं। पीड़ित आज तक यह नहीं जान सके कि जो अनहोनी उनके साथ हुई, उसका कारण क्या था और किसने घटना को अंजाम दिया।