अधिक प्रभावित इलाके
सहजनवां, कौड़ीराम, गोला, खजनी, बांसगांव, सरदारनगर, कैंपियरगंज, पिपराइच, पीपीगंज, चौरीचौरा, पनियरा, निचलौल, ठूठीबारी, सिकरीगंज, बड़हलगंज समेत अन्य ग्रामीण इलाके।
टावरों की स्थिति
- कुल टावरों की संख्या : 425
- बीएसएनएल के टावर - 273
- प्राइवेट कंपनियों के टावर - 152
बैटरियां हो गईं खराब
बीएसएनएल ने अपने टावरों में विकल्प के रूप में बैटरी रखी थी। बिजली से चार्ज होने के बाद जरूरत पड़ने पर इनसे बैकअप लिया जाता था। लेकिन, सालों से बैटरी की मरम्मत नहीं होने से लगभग सभी बैट्रियां खराब हो गई हैं। कुछ जो सही हैं, उनसे थोड़ी देर तक ही बैकअप मिल पाता है।
निजी कंपनियों का कैसे करें मुकाबला
बीएसएनएल के पास बैटरी और डीजल के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। इसके बावजूद निजी टेलीकॉम कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी है। निजी संचार कंपनियां 4जी नेटवर्क के साथ बाजार में हैं, जबकि बीएसएनएल 3जी सेवा उपलब्ध करा पा रहा है। ऐसे में बीएसएनएल निजी संचार कंपनियों का कैसे मुकाबला कर सकता है यह बड़ा सवाल है।