भाई आदिल खान, डॉ. कफील खान
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डॉ. कफील खान की मुंबई से गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश है। अगर वह इतने ही बड़े दोषी हैं कि उन्हें मुंबई से एसटीएफ यूनिट की टीम को लगाकर गिरफ्तार करना पड़ा तो 23 जनवरी को यह टीम कहां थी? इसी दिन वह प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य देवेश चुतर्वेदी के सामने बहराइच मामले में विभागीय जांच के लिए दो घंटे से अधिक समय तक रुके थे। आखिर, तब और अब में इतना बड़ा अपराध कौन सा हो गया कि उन्हें ऐसे गिरफ्तार करना पड़ा। ये बातें डॉ. कफील के बड़े भाई अदील खान ने अमर उजाला से कहीं।
उन्होंने बताया कि डॉ. कफील पर मुकदमा 12 दिसंबर को दर्ज किया गया था। इसके बाद लगातार दो दिन 23 व 24 दिसंबर को लखनऊ में थे। इस दौरान वह गोरखपुर भी आए, लेकिन पुलिस की तरफ से इस तरह की कोई कार्रवाई का अंदेशा नहीं था। बताया कि दरअसल, 30 जनवरी को मंबई के मुंबई बाग में सीएए और एनआरसी को लेकर हो रहे प्रदर्शन में डॉ कफील को जाना था। इसलिए वह मुंबई भी गए थे। उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत एयरपोर्ट पर उतरते ही गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने दावा किया कि अलीगढ़ में जिन आरोपों पर उनपर मुकदमा दर्ज किया गया है, वह सब निराधार है। डॉ. कफील के वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद हैं, उन्हें सुनकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्या उन्होंने कोई ऐसी बातें वहां कहीं कि उन्हें जेल जाना पड़े।
उन्होंने एसटीएफ की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि 7 साल तक की सजा के अपराध के मामलों में पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर सकती। ऐसे में धारा 153 ए के तहत, जिसमें अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है, इसमें आखिरकार गिरफ्तारी क्यों की गई ?