इंदरसनी के नाच और लोक गायक रामदरश शर्मा ने बांधा समां
आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत पांच दिवसीय नाट्य समारोह ‘आजादी के रंगोत्सव’ के दूसरे दिन लोकनृत्य में राममूरत एवं समूह इंदरसनी के नाच और लोक गीत की कड़ी में लोक गायक रामदरश शर्मा ने समां बांध दिया। दर्शकों ने प्रेक्षागृह में सजे ‘कलागंज’ की साज सज्जा भी देखी। ‘स्कंदगुप्त’ काल की पगड़ियों और भारतीय एवं पश्चिम के नाट्य जगत के कपड़ों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। जगह जगह सेल्फी लेने की लोगों में होड़ लगी थी। शुरुआत लोकमंच पर रंगकर्मी आसिफ जहीर के निर्देशन में नाटक खुदीराम बोस के मंचन से हुई। खुदी राम बोस की छोटी उम्र में देश की आजादी के लिए दिए गए बलिदान को रेखांकित करता यह नुक्कड़ नाटक उनके साहस से भी दर्शकों को परिचित करता है। देश की आजादी के महानायकों को श्रद्धांजलि देते हुए पारंपरिक लोकनृत्य लेकर लोक कलाकार राम मूरत एवं उनकी टीम ने इंदरसनी के नाच की प्रस्तुति दी।
मृदंग, कसावर, सिंगी, खजड़ी और पैंरो में बड़े बड़े घुंघरू पहने कलाकारों ने मां भगवती की आराधना के लोक नृत्य से लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। मंच पर लबार और लौंडानाच के महत्व को भी कलाकारों ने समझाया। जगतबेला के राममूरत के साथ नर्तकी की भूमिका में चंदन कुमार और विनोद भारती, साधू, दशरथ कुमार भारती, बाढू, राजेश, लालबिहारी की सबने सराहना की। उसके बाद मंच पर लोक गायक राम दरस शर्मा ने देश भक्ति की भाव भूमि से एक से बढ़ कर एक गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। शुरूआत ‘के बदले ना इ तिरंगा के निशानी हमरे..’ गीत से की। संचालन रीता श्रीवास्तव ने किया।
इस अवसर पर भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रवि शंकर खरे, हरि प्रसाद सिंह, वरिष्ठ रंगकर्मी दीपक सोनी, प्रशांत श्रीवास्तव, रंगकर्मी अजीत सिंह, मानवेंद्र त्रिपाठी, सुभाष दूबे, नागेंद्र, डॉ. आशीष श्रीवास्तव, वादिनी यादव, मनीष चौबे, अनिल कुमार त्रिपाठी, राकेश उपाध्याय, संदीप श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।