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रंगोत्सव कार्यक्रम: लाइव शो 'महाभारत द एपिक टेल' की कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुति, गूंजती रहीं दर्शकों की तालियां

Thu, 06 Jan 2022 01:28 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

नाटक के जरिए बताया गया कि धरती मां, हमेशा युद्ध में महाविनाश की साक्षी रही है। साउंड, प्रकाश के संयोजन, स्क्रीन पर उभरते चित्रों ने कथानक प्रस्तुत करने में प्रभावी भूमिका निभाई।
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आजादी के रंगोत्सव कार्यक्रम में प्रस्तूति देते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत आजादी का रंगोत्सव कार्यक्रम के दूसरे दिन नाटक ‘महाभारत द एपिक टेल’ की जोरदार प्रस्तुति कलाकारों ने दी। भारतेंदु नाट्य अकादमी, संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन की ओर से आयोजित रंगोत्सव में फेलीसिटी थियेटर मुंबई के अभिनेता, लेखक एवं निर्देशक पुनीत इस्सर के निर्देशन में हुए लाइव थियेटर में किरदारों ने दर्शकों को बांध कर रखा।

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नाटक के जरिए बताया गया कि धरती मां, हमेशा युद्ध में महाविनाश की साक्षी रही है। साउंड, प्रकाश के संयोजन, स्क्रीन पर उभरते चित्रों ने कथानक प्रस्तुत करने में प्रभावी भूमिका निभाई। छोटे पर्दे के बड़े अभिनेता गूफी पेंटर, सिद्धांत इस्सर, यशोधन राणा, दानिश अख्तर, करन शर्मा, सचिन जोशी, संजय मखीजा ने क्रमश: शकुनि, बालक दुर्योधन, भगवान कृष्ण, भीम, अर्जन, विदुर, परशुराम एवं धृतराष्ट्र के किरदार को जीवंत किया। तपस्या दास गुप्ता, हरलीन कौर रेखी, भरत शर्मा, सम्राट भल्ला, दीक्षा रैना, नयना सागर, ज्योतिका सिंघल, नीलम ने अपनी अपनी भूमिकाओं में अपनी अभिनय क्षमता का भरपूर परिचय दिया। उद्भव ओझा के कर्ण प्रिय संगीत अभिकल्पना से सजी हुई प्रस्तुति गोरखपुर के रंगकर्मियों को भी सीखने के लिए काफी अवसर दिया है।

नाटक का कथानक महाभारत की कथा के किरदार दुर्योधन, कर्ण और द्रोपदी के इर्द गिर्द बुना गया है। नाटक में पहली बार जहां दुर्योधन और कर्ण के बीच निस्वार्थ व बिना शर्त दोस्ती और वफादारी दिखी। बल्कि, उन कारणों को सामने भी लाया जिसके कारण युद्ध का माहौल बना। द्रोपदी का अहंकार, शकुनि की चतुराई और दुर्योधन का हठ के नीचे सच्ची दोस्ती, बिना शर्त बलिदान और दो दोस्तों ‘दुर्योधन और कर्ण’ के बीच बंधुत्व की विस्मृत कथा को रेखांकित किया गया। दूसरी ओर पांडवों की दुविधा, कुंती की पीड़ा, गांधारी की लाचारी और भगवान कृष्ण का मार्गदर्शन भी अच्छे से प्रदर्शित किया गया। निर्माता राहुल बुचर के फेसेलिटी थियेटर मुंबई की प्रस्तुति लंबे समय तक लोगों को याद रहेगी।

नाटक ‘कंपनी उस्ताद’ को मिली दर्शकों की सराहना

रंगोत्सव के दूसरे दिन निर्माण कला मंच पटना की नाट्य प्रस्तुति ‘कंपनी उस्ताद’ का मंचन बेहद सफल रहा। संजय उपाध्याय के निर्देशन में नाटक आजादी की लड़ाई को जोरदार ढंग से सामने लाने में सफल रहा। नाटक में स्वरम उपाध्याय, महिमा, रागिनी कश्यप, साधना श्रीवास्तव, विवेक कुमार, धीरज कुमार व आजाद हुसैन ने अभिनय किया। दृश्यानुरूप सुमधुर संगीत एवं प्रकाश प्रभाव से सजी प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा। 

 
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इंदरसनी के नाच और लोक गायक रामदरश शर्मा ने बांधा समां

आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत पांच दिवसीय नाट्य समारोह ‘आजादी के रंगोत्सव’ के दूसरे दिन लोकनृत्य में राममूरत एवं समूह इंदरसनी के नाच और लोक गीत की कड़ी में लोक गायक रामदरश शर्मा ने समां बांध दिया। दर्शकों ने प्रेक्षागृह में सजे ‘कलागंज’ की साज सज्जा भी देखी। ‘स्कंदगुप्त’ काल की पगड़ियों और भारतीय एवं पश्चिम के नाट्य जगत के कपड़ों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। जगह जगह सेल्फी लेने की लोगों में होड़ लगी थी। शुरुआत लोकमंच पर रंगकर्मी आसिफ जहीर के निर्देशन में नाटक खुदीराम बोस के मंचन से हुई। खुदी राम बोस की छोटी उम्र में देश की आजादी के लिए दिए गए बलिदान को रेखांकित करता यह नुक्कड़ नाटक उनके साहस से भी दर्शकों को परिचित करता है। देश की आजादी के महानायकों को श्रद्धांजलि देते हुए पारंपरिक लोकनृत्य लेकर लोक कलाकार राम मूरत एवं उनकी टीम ने इंदरसनी के नाच की प्रस्तुति दी।

मृदंग, कसावर, सिंगी, खजड़ी और पैंरो में बड़े बड़े घुंघरू पहने कलाकारों ने मां भगवती की आराधना के लोक नृत्य से लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। मंच पर लबार और लौंडानाच के महत्व को भी कलाकारों ने समझाया। जगतबेला के राममूरत के साथ नर्तकी की भूमिका में चंदन कुमार और विनोद भारती, साधू, दशरथ कुमार भारती, बाढू, राजेश, लालबिहारी की सबने सराहना की। उसके बाद मंच पर लोक गायक राम दरस शर्मा ने देश भक्ति की भाव भूमि से एक से बढ़ कर एक गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। शुरूआत ‘के बदले ना इ तिरंगा के निशानी हमरे..’ गीत से की। संचालन रीता श्रीवास्तव ने किया।

इस अवसर पर भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रवि शंकर खरे, हरि प्रसाद सिंह, वरिष्ठ रंगकर्मी दीपक सोनी, प्रशांत श्रीवास्तव, रंगकर्मी अजीत सिंह, मानवेंद्र त्रिपाठी, सुभाष दूबे, नागेंद्र, डॉ. आशीष श्रीवास्तव, वादिनी यादव,  मनीष चौबे, अनिल कुमार त्रिपाठी, राकेश उपाध्याय, संदीप श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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