कुछ लोगों का संकल्प मृत्यु के साथ ही नश्वर शरीर के मिट्टी में मिल जाने की बात को झुठला देता है। ऐसा ही उदाहरण है, रामजानकी नगर के पारसनाथ चौरसिया की पत्नी विमला का। 86 वर्ष की उम्र में बृहस्पतिवार को उनका देहांत हो गया। पत्नी के संकल्प को पूरा करते हुए पति ने मेडिकल कॉलेज को उनका शरीर दान कर दिया। अब उनके शरीर के अंग दूसरों के शरीर में जिंदा रहेंगे।
पारसनाथ और विमला को कोई संतान नहीं है। वर्ष 2017 में दधीचि देहदान संस्थान, कानपुर में देहरादून के सेंगर नामक व्यक्ति के देहदान से प्रेरित होकर दोनों ने खुद भी ऐसा करने का संकल्प लिया था। दंपती ने चार अक्तूबर 2017 को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एनाटामी विभाग एवं नेत्र रोग विभाग में देहदान व कार्निया दान करने का रजिस्ट्रेशन करवाया था।
पारसनाथ चौरसिया का कहना है कि पत्नी से बिछड़ने का गम है, लेकिन देहदान करके अपने को बहुत धन्य मान रहे हैं। विमला चौरसिया की मृत्यु बृहस्पतिवार की भोर में तीन बजे हुई। एक घंटे बाद ही पारसनाथ ने फोन करके एनाटामी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर योगेंद्र सिंह को सूचना दी।