नाव के इंतजार में बैठे रहे किसान
गंडक नदी पर पीपा पुल अथवा पक्का पुल न होने से क्षेत्र के लोगों को हमेशा जान जोखिम में डालकर नदी उस पार खेती करने जाना पड़ता है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि यहां पुल होता तो आवागमन में सहूलियत होती। शनिवार को भी कई किसान नदी के किनारे खाद-बीज लेकर नाव का इंतजार करते मिले।
दशहवा निवासी अमरजीत ने बताया कि सुबह आठ बजे से घाट पर खाद-बीज लेकर बैठा हूं, लेकिन नाव न होने से वापस घर जाना पड़ रहा है। जमुआन निवासी इंद्रासन यादव ने कहा कि गरीबों की कोई सुनने वाला नहीं है। जब चुनाव आता है तो नेताओं का हुजूम खड़ा हो जाता, लेकिन एक पुल निर्माण के लिए कोई सरकार नही हैं।
बैकुंठपुर निवासी बिरझनिया देवी ने कहा कि 12 किलोमीटर दूर से रोज आना जाना रहता है। सुबह से शाम तक आधा दिन नाव से जाने में ही लग जाता तो समय से काम भी नहीं हो पाता है। बैकुंठपुर निवासी धर्मशीला देवी ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर खेती करने के लिए नदी उस पार जाना पड़ता है। कभी नाव खराब तो कभी नदी में बाढ़ के कारण खेती समय से नहीं हो पाती है।
विधायक ने सदन में उठाया था मामला
तमकुहीराज के विधायक एवं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने बताया कि गंडक नदी पर पुल न होने की समस्या अपने कार्यकाल में छह बार उठा चुके हैं। उन्होंने अमवादीगर व बरवापट्टी घाट पर पीपा पुल लगवाने के लिए भी सदन में मांग की थी। दो मर्तबा सर्वे भी हो चुका है लेकिन फिर वह ठंडे बस्ते में चला गया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के किसानों का मुख्य साधन खेती है। किसान अपनी जान जोखिम में डालकर प्रतिदिन नदी पार करते हैं जिससे कई बार दुर्घटना हो चुकी है लेकिन सरकार इनकी समस्याओं की अनदेखी करती है।