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UP: शिवप्रताप को बड़ा ओहदा देकर BJP ने ब्राह्मणों में दिया सियासी संदेश, निष्ठा व बेदाग छवि से हैं लोकप्रिय

Mon, 13 Feb 2023 12:19 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।

सार

शिवप्रताप, 50 वर्ष से राजनीति में सक्रिय हैं। उनकी पकड़ भाजपा के अलावा आरएसएस, हिंदू संगठनों में भी है। वहीं, पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा, बेदाग छवि से पार्टी शीर्ष नेतृत्व के करीब हैं तो वहीं जनता में भी उनके प्रति रायशुमारी अच्छी है।
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केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रदेश के कद्दावर नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवप्रताप शुक्ला को राज्यपाल बनाकर भाजपा के क्षत्रपों ने लोकसभा चुनाव के पहले बड़ा संदेश दिया है। शिवप्रताप की पैठ ब्राह्मण वर्ग में अच्छी है, उन्हें बड़े ओहदे पर बैठाकर पूर्वांचल के ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की गई है।

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शिवप्रताप, 50 वर्ष से राजनीति में सक्रिय हैं। उनकी पकड़ भाजपा के अलावा आरएसएस, हिंदू संगठनों में भी है। वहीं, पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा, बेदाग छवि से पार्टी शीर्ष नेतृत्व के करीब हैं तो वहीं जनता में भी उनके प्रति रायशुमारी अच्छी है। शिवप्रताप को राज्यपाल बनाए जाने से ब्राह्मण वर्ग में अच्छा संदेश गया है। राजनीतिक विशलेषकों का मानना है कि पूर्वांचल में इसका फायदा जरूर मिलेगा।

हर पार्टी ब्राह्मणों को सहेजने में है जुटी
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर इस समय हर पार्टी ब्राह्मणों को साधने में जुटी है। बसपा ने चुनाव में ब्राह्मण वर्ग को सहेजने के लिए सम्मेलन करा रही है। वहीं, सपा भी चुनाव खास तवज्जो देने के मूड में है। पूर्वांचल में ब्राह्मणों के सबसे बड़ा चेहरा पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी के बेटे पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी को सपा ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह दी है।
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विनय शंकर तिवारी को पूर्वांचल में होने वाले सम्मेलनों में सपा ब्राह्मण चेहरे के तौर पर लाएगी। अब, शिवप्रताप शुक्ल को राज्यपाल बनाकर भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक खेला है। बहरहाल, इससे कितना फायदा भाजपा को होगा यह तो लोकसभा चुनाव में पता चलेगा, लेकिन फौरीतौर पर इसका फायदा जरूर मिला है।

यूपी में ब्राह्मणों की संख्या कुल आबादी का करीब 15 फीसदी है। जब भी ब्राह्मण मतदाता एक होकर वोट किए हैं, सरकार बनाने में उनकी भूमिका अहम रही है। वर्ष 2007 में मायावती की अगुआई में बसपा ने ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम वोट बैंक को एक पाले में लाने में सफलता दर्ज की थी। तब बसपा ने 86 सीटों पर ब्राह्मणों को उतारा था। ब्राह्मणों ने मायावती को भी एकजुट होकर वोट दे दिया। मायावती का सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला कामयाब रहा था।

वहीं, पिछले तीन चुनावों की बात करें तो ब्राह्मण वोट बैंक का झुकाव भाजपा की तरफ रहा है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी ब्राह्मणों की पहली पसंद भाजपा रही। हर बार पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनी। वर्ष 2024 में भी भाजपा जातीय संतुलन के आधार पर तैयारी में जुटी है। माना जा रहा है कि शिवप्रताप को बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी भी इसी की कड़ी है।
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