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देवरिया: आजादी के बाद पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर खिला कमल, गिरीश चंद्र तिवारी हुए विजयी

Sat, 03 Jul 2021 05:57 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया।

सार

जिला परिषद के 47 वर्ष और जिला पंचायत के 26 वर्ष बीत गए कार्यकाल, जिला पंचायत अध्यक्ष के आठवें अध्यक्ष बनें,  भाजपा प्रत्याशी गिरीश चंद्र तिवारी।
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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव परिणाम। - फोटो : अमर उजाला।
आजादी के बाद पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कमल खिला है। भाजपा प्रत्याशी गिरीश चंद्र तिवारी ने चुनाव जीतकर जिला पंचायत के आठवें अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त किया है। जिला परिषद अध्यक्ष के 47 और जिला पंचायत अध्यक्ष के 26 वर्ष के कार्यकाल में कई बार चुनाव हुए लेकिन कभी अध्यक्ष की कुर्सी पर कमल नहीं खिल सका। भाजपा प्रत्याशी गिरिश तिवारी ने चुनाव जीतकर न केवल एक इतिहास कायम किया है। बल्कि पहली बार जिला पंचायत में कमल खिलाने का श्रेय उन्हें मिला हैं।
 
जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सियासी मायने में काफी महत्वपूर्ण था। जिला परिषद का पहला चुनाव एक मई 1948 को हुआ। जहां चंद्रशेखर पांडेय शास्त्री को पहला अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ। इनके बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रयागध्वज सिंह वर्ष 1961 में अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 15 जुलाई 1963 को मोहम्मद फारूक चिस्ती अध्यक्ष नामित हुए। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर ...


 
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भाजपा प्रत्याशी गिरीश चंद्र तिवारी। - फोटो : अमर उजाला।
25 अक्तूबर 1963 को राजमंगल पांडेय को अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ। इसके बाद दोबारा प्रयागध्वज सिंह 13 अप्रैल 1969 को अध्यक्ष बने। वर्ष 1974 में बिरजानंद सिंह अध्यक्ष बनें। वर्ष 1989 में गौकरण सिंह अध्यक्ष बने, उनके कार्यकाल के दौरान एक माह के लिए सुभाष त्रिपाठी को अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ।
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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव परिणाम। - फोटो : अमर उजाला।
छह अक्तूबर 1994 को गौकरण सिंह दोबारा अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन हो गए और 22 मई 1995 तक रहे। जिला परिषद के वह अंतिम अध्यक्ष रहे। उधर पंचायती राज अधिनियम लागू होने के बाद वर्ष 1995 के चुनाव में भाजपा ने भाग्य आजमाया। दमयंती विश्वकर्मा चुनाव लड़ीं लेकिन हार गईं। कांग्रेस की द्रौपदी मल्ल चुनाव जीत गईं।

 

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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव परिणाम। - फोटो : अमर उजाला।
अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद धनंजय राव को अध्यक्ष बनाया गया। इसी दौरान 1999 में हुए चुनाव में सपा की शकुंतला यादव अध्यक्ष बनीं। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में कृष्णा जायसवाल निर्दल चुनाव जीतकर अध्यक्ष बनीं। अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद कुछ दिनों के लिए राणाप्रताप सिंह अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुए।

 
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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
वर्ष 2005 के चुनाव में आनंद कुमार सिंह चुनाव जीते। वर्ष 2010 के चुनाव में तत्कालीन बसपा एमएलसी श्रीनाथ एडवोकेट की पत्नी बालेश्वरी देवी अध्यक्ष चुनी गईं और कार्यकाल पूरा किया। वर्ष 2015 के चुनाव में सपा के रामप्रवेश यादव चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने लेकिन कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। लंबे समय बाद गिरीश चंद्र तिवारी अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेंगे।
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