गोरखपुर में कोरोना संक्रमण के इलाज में इन दिनों रेमडेसिविर इंजेक्शन जीवन रक्षक बनी हुई है। इसकी मांग भी बहुत ज्यादा है लेकिन श्रीमंत हेट्रो हेल्थ केयर लिमिटेड कोविफोर ब्रांड नाम से बनाए गए इंजेक्शन कोवीफोर के एक बैच के इंजेक्शन में ड्रग विभाग को तकनीकी खामी मिली है। इसके बाद हड़कंप मच गया है। विभाग ने कोविफोर के बैच संख्या एचसीएल 21013 के उपयोग पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं इस बैच के सभी इंजेक्शन की तलाश भी शुरू हो गई है। विभाग इसके लिए रिकॉर्ड खंगाल रहा है।
औषधि अनुज्ञापन एवं नियंत्रण अधिकारी एके जैन का पत्र प्रशासन और ड्रग विभाग को बृहस्पतिवार को मिला है। उसके बाद से अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। हेट्रो कंपनी की डीलरशिप एक ही व्यापारी के फर्म के पास है। ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने डीलर से अब तक मिले इंजेक्शन का ब्योरा और उनके बैच नंबर का रिकॉर्ड तलब किया है।
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि शासन से जारी अलर्ट का पत्र मिला है। इसके बाद से रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि इस बाबत अस्पतालों से ब्योरा लिया जाएगा। अस्पताल भी मरीज को इंजेक्शन लगाते समय उसका बैच नंबर नोट रखते हैं। इस पत्र के बाद दवा व्यापारी भी हरकत में आ गए हैं।
अपने स्तर पर पता लगाने में जुट गए हैं। दरअसल, रेमडेसिविर इंजेक्शन को आधा दर्जन कंपनियां अलग-अलग ब्रांड नामों से निर्मित करती है। लेकिन अभी एक कंपनी के एक बैच की बिक्री पर रोक लगाई गई है। अब तकनीकी खामी किस तरह की है, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है।इस सिलसिले में दवा कंपनी का पक्ष नहीं मिल सका है। पक्ष मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा।