चीनी मिल और गन्ना किसानों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी गन्ना सहकारी समितियों की हालत खस्ता है। गोरखपुर जिले के पिपराइच केन यूनियन में 26 वर्ष से बैलेंस सीट ही अपडेट नहीं हुई है। इसके चलते सेवानिवृत्त 23 कर्मचारियों को बकाया वेतन, एरियर और पीएफ की रकम भी नहीं मिल पा रही है। मामला जब मुख्यमंत्री तक पहुंचा, तब केन यूनियन ने इसे अपडेट कराना शुरू किया।
गन्ना किसानों की सहूलियत के लिए सहकारी गन्ना समितियों की स्थापना की गई थी। समितियां ही मिल को गन्ना बेचती हैं। बदले में इन्हें कमीशन मिलता है, जिससे समिति कर्मचारियों को वेतन देती हैं व अन्य खर्च चलते हैं। वर्ष 1995 में उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की सभी मिलें घाटे में चली गईं। उसके बाद से सरकार ने मिलों को बेचना व बंद करना शुरू कर दिया। पिपराइच चीनी मिल भी घाटे के चलते बंद हो गई थीं। इसका असर यहां की केन यूनियन पर भी पड़ा और कर्मचारियों को वेतन भी मिलना बंद हो गया।
कर्मचारी अयोध्या सिंह, गोरख सिंह, आनंद सिंह, सूर्यलाल वर्मा आदि ने बताया कि वेतन नहीं मिलने पर उन लोगों ने केन कमिश्नर के यहां शिकायत की। इस पर उन्हें अन्य समितियों में स्थानांतरण का सुझाव दिया गया। साथ ही विकल्प भी मांगे गए। इसके बाद अधिकतर कर्मचारियों ने दूसरी अन्य समितियों में अपना स्थानांतरण करा लिया। अब जब ये कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं तो उन्हें बकाया ही नहीं मिल रहा है। वजह यह कि समिति की बैलेंस सीट ही अपडेट नहीं है।