सात साल या उससे कम की सजा में अभियुक्त की गिरफ्तारी के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट आशुतोष वर्मा ने अभियुक्त गौरव उर्फ पप्पी की रिमांड याचना निरस्त करते हुए उसे 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा कर दिया। साथ ही विवेचक योगेंद्र कुमार राय के खिलाफ विधिक कार्रवाई के लिए आदेश की एक प्रति वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रेषित की गई।
विवेचक ने अभियुक्त गौरव उर्फ पप्पी को मुकदमा अपराध संख्य 34/2024 धारा 336, 338, 504, 506 भारतीय दंड संहिता, थाना गीडा अतिरिक्त धारा 307 भारतीय दंड संहिता की बढ़ोतरी कर गिरफ्तार किया और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
विवेचक ने न्यायालय से उसे न्यायिक अभिरक्षा में लिए जाने के लिए याचना की। अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज धर दूबे ने रिमांड प्रार्थनापत्र का विरोध करते हुए कहा कि विवेचक ने जिन धाराओं में रिमांड के लिए याचना की है वह धारा सात वर्ष या उससे कम दंडावधि से दंडनीय है।
विवेचक ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य व सत्येंद्र कुमार अंटिल बनाम सीबीआई में दिए गए दिशा निर्देशों का उल्लंघन किया है। इस स्तर पर विवेचक द्वारा प्रस्तुत प्रपत्रों के आधार पर न्यायालय को प्रतीत हुआ कि मामले में धारा 307 का अपराध नहीं बनता है, जिसके आधार पर अदालत ने रिमांड याचिका निरस्त कर दी।