बीटेक छात्रों ने बनाया सेफ्टी सूज।
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आदित्य ने बताया इस तकनीक को विकसित करने की प्रेरणा छेड़खानी और बच्चों के बढ़ते अपहरण के मामलों से मिली। संदीप यादव ने इस तकनीक को विकसित करने का विचार साझा किया। जिसके बाद शिक्षकों के मार्गदर्शन में दस दिनों में शेफ्टी सूज तैयार किया गया।
ऐसे मारेगा करंट
आदित्य ने बताया कि पूरा सिस्टम जूते के शोल में फिट रहेगा। इसमें 3.7 वोल्टेज की बैटरी रहेगी। जेनरेटर सिस्टम डीसी करंट को बढ़ाकर चार लाख वोल्टेज तक करेगा। जूते में आगे की तरफ एक बटन लगा रहेगा, जिसे दबाते ही एक पिन बाहर आ जाएगी। इसे छूते ही सामने वाले को करंट लगेगा। खास बात यह है कि एक से ज्यादा बार दबाने पर भी बैटरी डिस्चार्ज नहीं होगी।
स्वत: चार्ज होगी बैटरी
जूते में लगी बैटरी स्वत: चार्ज होगी। जैसे-जैसे जूता पहनने वाला व्यक्ति चलेगा, बैटरी चार्ज होती जाएगी।
जीपीएस ट्रैकर से पता लगेगा लोकेशन
सेफ्टी शूज में जीपीएस ट्रैकर लगा हुआ है। ब्लू टूथ के माध्यम से यह मोबाइल फोन से जुड़ा रहेगा। इसमें कई नंबर फीड हो सकेंगे। अगर कोई व्यक्ति अपहृत है तो घबराहट के चलते उसके पैर का तलवा ठंडा होने लगेगा। जूते में लगे सेंसर ऑटोमेटिक पैनल से पहले अलर्ट कॉल जाएगा, जैसे ही फोन कटेगा लाइव लोकेशन का लिंक चला जाएगा।