शाखा के दौरान उन्हें भी कई कविताएं सुनाई। उन्होंने बात करने का लहजा, मुद्दों पर समझ से स्पष्ट हो चुका था कि वाजपेयी जी ऐतिहासिक व्यक्ति होने वाले हैं। तब तक कल्पना भी नहीं हुई थी कि अटल बिहारी वाजपेयी राजनेता और प्रधानमंत्री हो सकते हैं।
कानपुर में भी वाजपेयी जी से मुलाकात का जिक्र किया है। मन में संघ के लिए काम करने का धुन सवार लिए वाजपेयी जी संघ के प्रचारक बन गए। बाद में राष्ट्रधर्म, पांचजन्य के संपादक बने। सन 1951 में जनसंघ का जन्म हुआ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का उत्तर प्रदेश में दौरा था। पत्रकार होने के नाते वाजपेयी भी साथ में थे।
डॉ. मुखर्जी के पहुंचने में देर होने पर लोगों को बांधे रखने के लिए वाजपेयी जी के भाषण से लोग मंत्रमुग्ध हो गए। वहीं डॉ. मुखर्जी ने कश्मीर आंदोलन के दौरान जेल जाने पर अपना संदेश देश के लोगों तक पहुंचाने के लिए अटल जी उनके निजी सचिव बनाए गए। इस प्रकार वाजपेयी जी पत्रकार से राजनीतिज्ञ बन गए।