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जन्मदिन विशेष: गोरखपुर में नानाजी देशमुख का हुआ था वाजपेयी जी से परिचय

Fri, 25 Dec 2020 02:27 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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अटल बिहारी वायपेयी। (फाइल फोटो) - फोटो : Social media
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बड़े भाई की गोरखपुर में शादी के बाद अटल बिहारी वाजपेयी का यहां लगातार आना-जाना लगा रहता था, यहां वो संघ की शाखा में भी शामिल होते रहे थे। दो दिवसीय संघ शाखा के दौरान ही भारतीय जनसंघ के आधार स्तंभ एवं दीनदयाल शोध संस्थान के संस्थापक नानाजी देशमुख की अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात हुई थी।  

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नानाजी देशमुख ने ‘हमारे अटल जी’ नामक पुस्तक के ‘इस प्रकार बने पत्रकार से राजनीतिज्ञ’ शीर्षक अध्याय में अटल बिहारी वाजपेयी के साथ गोरखपुर में बिताए गए दिनों को साझा किया है। अपने संस्मरण में जिक्र करते हुए नानाजी देशमुख ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध का दौर चल रहा था।

अटल बिहारी वाजपेयी अपनी भाभी को पहुंचाने गोरखपुर आए थे। यहां आने के बाद स्वयंसेवक होने की वजह से वो ‘संघ शाखा’ में भी पहुंचे। शाखा में ही वाजपेयी जी से परिचय हुआ था। शाखा के दौरान की यादों का जिक्र करते हुए नानाजी देशमुख ने लिखा है कि वाजपेयी जी का अधिकांश समय स्वयंसेवकों के साथ बीतता था। तब तक उन्होंने अनेक कविताओं की रचना कर ली थी।
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शाखा के दौरान उन्हें भी कई कविताएं सुनाई। उन्होंने बात करने का लहजा, मुद्दों पर समझ से स्पष्ट हो चुका था कि वाजपेयी जी ऐतिहासिक व्यक्ति होने वाले हैं। तब तक कल्पना भी नहीं हुई थी कि अटल बिहारी वाजपेयी राजनेता और प्रधानमंत्री हो सकते हैं।

कानपुर में भी वाजपेयी जी से मुलाकात का जिक्र किया है। मन में संघ के लिए काम करने का धुन सवार लिए वाजपेयी जी संघ के प्रचारक बन गए। बाद में राष्ट्रधर्म, पांचजन्य के संपादक बने। सन 1951 में जनसंघ का जन्म हुआ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का उत्तर प्रदेश में दौरा था। पत्रकार होने के नाते वाजपेयी भी साथ में थे।

डॉ. मुखर्जी के पहुंचने में देर होने पर लोगों को बांधे रखने के लिए वाजपेयी जी के भाषण से लोग मंत्रमुग्ध हो गए। वहीं डॉ. मुखर्जी ने कश्मीर आंदोलन के दौरान जेल जाने पर अपना संदेश देश के लोगों तक पहुंचाने के लिए अटल जी उनके निजी सचिव बनाए गए। इस प्रकार वाजपेयी जी पत्रकार से राजनीतिज्ञ बन गए।
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