मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित।
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विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि ज्ञान की जिज्ञासा ने भारत को विश्व गुरु बनाया है। वैदिक काल से ही यहां ज्ञान के प्रति जिज्ञासा देखने और सुनने को मिली है। भारत के विद्वानों ने अपने ज्ञान से पूरे विश्व को न केवल प्रभावित किया है बल्कि राह भी दिखाई है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद भी इस दिशा में बेहतरीन काम कर रही है।
गुरुवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि विधान सभा अध्यक्ष ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि श्रीगोरक्षपीठ से दुनिया तक यहां की आभा, यहां का ज्ञान-विज्ञान पहुंचा और संसार को सुंदर बनाया। शिक्षा की दृष्टि से राष्ट्र संपन्न हो इसी दृष्टि से सन 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना हुई। उद्देश्य स्पष्ट था- आध्यात्मिक एवं भौतिक उन्नति। आध्यात्मिक उन्नति एवं भौतिक उन्नति दोनों एक साथ चलें तो धरती स्वर्ग हो जाए और अमरत्व भी प्राप्त हो। श्री गोरक्षपीठ संस्कृत और संस्कृति की उपासना की केंद्र है। यहां अध्यात्म और संसार दोनों को एक साथ देखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मैक्स मूलर ने भारत में सिविल सेवा में आने वाले लंदन के छात्रों को अपनी पुस्तक ‘इंडिया : व्हाट इट कैन टीच अस’ में भारत के दर्शन, उपनिषदों, ऋषियों-मुनियों के संदर्भ में बताया। उन्होंने बताया कि भारत विचित्र देश है। वहां से हम अनेक बातें सीख सकते हैं। मैक्स मूलर का भारत, विवेकानंद का भारत यदि भारत में कहीं है तो वह श्री गोरक्षपीठ में है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा परिषद का यह आयोजन अनूठा है। इससे भारत की अन्य शिक्षण संस्थाएं प्रेरणा ग्रहण कर आगे बढ़ सकती हैं।