गोरखपुर जिले के करीब 4.32 लाख बच्चों में करीब 64 हजार के कुपोषित मिलने पर डीएम ने नई व्यवस्था बनाई है। इसके तहत हर आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को पांच से 10 बच्चों को गोद लेना होगा। उन्हें बच्चों को कुपोषित होने से बचाने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं पर अमल करना होगा।
डीएम विजय किरन आंनद ने प्रधानों को भी इस अभियान में शामिल होने को कहा है। बच्चों को गोद लेने के बाद एक-एक बच्चे का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। इसी के अनुसार पौष्टिक आहार दिया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में निर्देश जारी किए जा चुके हैं। मॉनीटरिंग के लिए टीम भी लगाई गई है।
डीएम विजय किरन आनंद ने बताया सभी आशा, आगंनबाड़ी कार्यकत्री और प्रधान को कुपोषित बच्चों को गोद लेना होगा। इनकी जिम्मेदारी होगी कि वे बच्चों का कुपोषण खत्म करें। इसकी हर महीने समीक्षा भी की जाएगी।
आंगनबाड़ी वर्करों के चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतें: डीएम
आंगनबाड़ी वर्कराें की होने वाली चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। इसमें किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। ये बातें जिलाधिकारी ने रविवार को जिला कार्यक्रम अधिकारी से कही।
डीएम विजय किरन आनंद ने विकास भवन में पोषण मिशन के अंतर्गत आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कार्यों की निगरानी के लिए कंट्रोलरूम स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास खंडों पर खुली बैठक नियमित रूप से आयोजित की जाए। सीडीपीओ कार्यालय को व्यवस्थित कर वहां पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित प्रशिक्षण कराया जाए।
सभी आंगनबाड़ी केंद्र नियमित रूप से खुलें और सबकी उपस्थिति अनिवार्य हो। यह सुनिश्चित हो कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करें। जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने दायित्व के प्रति लापरवाही बरते उसको हटाकर वहां पर सक्रिय कार्यकर्ता की तैनाती करें। सभी आंगनबाड़ी केंद्र पर कायाकल्प योजना के तहत कार्य कराएं जाए।
जिलाधिकारी ने पोषण माह सितंबर में किए गए कार्यों की समीक्षा की। उस समय संचालित योजनाओं के बारे में जाना। उन्होंने कहा कि पुष्टाहार वितरण की तिथि निर्धारित की जाए, उसका वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। वितरण में गड़बड़ी की शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कायाकल्प योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्य कराने के लिए कहा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर चिन्हित कुपोषित बच्चों के घर आंगनबाड़ी वर्कर को जाने का निर्देश देते हुए कहा कि बच्चों को सुपोषित करने का हर संभव उपाय करें।