गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन पर नौसड़ से लेकर डंवरपार तक की सड़कों के दोनों किनारे प्लाटिंग की गई है। मेहरौली गांव के पास ताल नंदौर में भी खेतों में ईंट से घेरेबंदी करके प्लाटिंग की गई है। सेवई के रहने वाले विनय सिंह बताते हैं- तीन से चार वर्ष में यहां जमीनों की कीमत आसमान छूने लगी है। बहुत कम ही लोगों ने नियम-कानून का पालन किया है। वरना यहां तो एंग्रीमेंट करके प्लाॅट बेचे जा रहे हैं। जब मामला फंसता है तो काश्तकार और जमीन खरीदने वाले झेलते हैं। प्लाटिंग करने वाले पल्ला झाड़ लेते हैं।
गीडा के आसपास के इलाकों में भी अवैध प्लाटिंग धड़ल्ले से की जा रही है। मेडिकल कॉलेज और फर्टिलाइजर क्षेत्र में सरैया के आगे तक प्लाटिंग हो गई है। यहां 1200 से 1500 रुपये प्रति वर्ग फुट तक जमीन बिक रही है। सिक्टौर चौराहे के दोनों तरफ दो से तीन किमी तक प्लाटिंग हो गई है। लोगों ने जमीन लेकर मकान बनवाना शुरू कर दिया है, जबकि मानचित्र पास ही नहीं है। मोहरीपुर पुल और बालापार के आगे तक यही हाल है। यहां तो 2000 रुपये प्रति वर्ग फीट तक जमीन बिक रही है।
गुलरिहा क्षेत्र में सड़क के किनारे हो रही प्लाटिंग।
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सतर्कता से बच सकती है पूंजी
अधिवक्ता रवि श्रीवास्तव ने कहा कि जमीनों की खरीद के पहले रजिस्ट्री कार्यालय में निर्धारित शुल्क जमा करके कागजों का मुआयना करा लेना बेहतर होता है। खतौनी के साथ बारहसाला की जांच करानी चाहिए। शुल्क बचाने की चक्कर में लोग लाखों की रकम गंवा बैठते हैं। अगर कागजातों की पड़ताल करके जमीन खरीदेंगे तो ठगे जाने का डर नहीं रहेगा। वरना आए दिन जालसाजी के मामले सामने आ रहे हैं। दूसरे की जमीन दिखाकर रजिस्ट्री करवा दी जा रही है। जालसाजों के फेर में फंसने वालों के जीवन भर की गाढ़ी कमाई डूब जा रही है।
जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने कहा कि जीडीए अपनी सीमा में समय-समय पर अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अभियान चलाता रहता है। अब तक चिह्नित 45 अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कराया जा चुका है। शहर में अवैध निर्माण व अवैध प्लाटिंग को चिह्नित करने के लिए हाल ही में हाइटेक सुविधाओं से लैस एक ड्रोन खरीदा गया है। इससे शहर में निगरानी कर अवैध निर्माण को चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है।