एक अक्तूबर इसके लिए समय सीमा भी तय की गई है, लेकिन अभी निर्माण की गति देखकर नहीं लगता है कि यह काम तय समय से हो पाएगा। सबसे बड़ी बात यह कि दोनों ही ठहराव वाले जगह में से एक भी जगह का काम पूरा नहीं हो पाया है।
नंदानगर की जमीन समतल होने के बाद इसे पूरा करने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन शौचालय, पानी की व्यवस्था अभी बाकी है। अस्थाई व्यवस्था पर अगर इसे शुरू भी कर दिए तो सुरक्षा का सवाल हो सकता है। क्योंकि यहां पर सीसीटीवी कैमरा या फिर रात में रोशनी की व्यवस्था नहीं हो पाई है। समय सिर्फ दो दिन ही बचा है।
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शुक्रवार को नंदानगर के पास चिह्नित जमीन को समतल करने का काम जारी था, लेकिन मेडिकल कॉलेज के पास की जमीन पर अभी कोई काम नहीं हो पाया है। वहां पर झाड़ियां ही नजर आ रही हैं। यहां पर कुछ भी काम नहीं हो सका है। यातायात पुलिस का मानना है कि इस काम को दो चरणों में ही पूरा किया जा सकता है। पहले बिहार वाली बसों को बाहर कर दिया जाएगा, फिर महराजगंज वाली पर काम होगा। कुल मिलाकर पुलिस प्रशासन की अब तक की तैयारी से साफ है कि इसे एक अक्तूबर से कर पाना संभव नहीं है।
सबसे बड़ी बात यह कि दोनों ही जगह शहर से बाहर हैं। नंदानगर के पास आनन-फानन अगर स्टैंड की शुरुआत कर भी दी गई तो यहां से यात्री ठगे ही जाएंगे। क्योंकि अभी तक यहां से ऑटो का किराया तय नहीं हो सका है। जबकि, एडीजी और कमिश्नर ने आदेश दिया था कि यात्रियों की सुविधा के लिहाज से किराया तय किया जाए ताकि, अतिरिक्त वसूली न हो सके। इस काम को अभी तक नहीं किया जा सकता है।
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ये फैसले लिए गए थे, एक अक्तूबर से पहले पूरा करना होगा काम
- ई-रिक्शा व ऑटो के लिए जगह का निर्धारण भी करना होगा।
- कुलसचिव आवास के पास की पार्किंग को दुरुस्त कर वहां से जिले के आसपास की बसों का होगा संचालन।
- नगर निगम को जमीन समतल करने, शौचालय व पानी की व्यवस्था करनी होगी।
- रोडवेज की बसें परिसर के अंदर खड़ी होंगी, पुलिस लगाएगी सीसीटीवी कैमरा।
- नंदानगर के पास से देवरिया, कुशीनगर व बिहार की बसों का संचालन होगा, पार्किंग बनेंगी।
- महराजगंज की तरह से आने-जाने वाली बसों का मेडिकल कॉलेज के पास से संचालन होगा।
- बसों के नए पार्किंग स्थल से शहर में आने के लिए ई-रिक्शा व ऑटो का किराया तय होगा।
- सड़क किनारे कब्जा किए गए लोगों को हटाकर व्यवस्थित किया जाएगा।
गोरखपुर शहर को जाम से मुक्ति दिलाने की कोशिश इसके पहले भी की गई थी, लेकिन उस पर काम नहीं हो पाया। कुछ दिन की पहल के बाद उसे बंद कर दिया गया था। इस बार एडीजी व कमिश्नर ने काम को पूरा कराने के लिए समय का निर्धारण भी कर दिया है। जिस वजह से उम्मीद है कि शायद प्रयोग सफल हो।
एसपी ट्रैफिक श्यामदेव विंद ने कहा कि पहले चरण में बिहार, देवरिया और कुशीनगर की प्राइवेट बसों को बाहर किया जाना है। इसके लिए नंदानगर में चिह्नित जमीन को समतल करने का काम चल रहा है। इसे पूरा कर लिया जाएगा। मेडिकल कॉलेज के पास अभी जमीन की तलाश की जा रही है। जिस जमीन को चिह्नित किया गया है, वहां पर शुक्रवार को मैं खुद गया था। जल्द ही यहां का काम भी पूरा होगा। किराया तय करने की जिम्मेदारी आरटीओ की है।