गृहिणी केवल घर चलाने वाली नहीं, बल्कि बहुआयामी विशेषताओं का संकलन होती है। गृहस्वामिनी के रूप में वह घर संवारती है तो पति की हर जरूरतों का ख्याल रखती है। कठिन समय में दृढ़ता का संबल बन परिवार को उबारने और अच्छे समय में सबको साथ लेकर चलने वाली होती है। सास-ससुर की सेवा की जिम्मेदार बेटी की तरह निभाती है। देवर-ननद के लिए सहेली और दोस्त जैसी बड़ी बहन की भूमिका निभाती है। बेटे-बेटियों के लिए प्रेरणादायी मां तो समाज के लिए मिलनसार महिला का रोल अदा करती है। न जाने कितने आयाम और खूबियां समेटे एक गृहिणी हर रोज कई भूमिकाओं में नजर आती है।
परिवार के लिए छोड़ दी डॉक्टरी, अब अच्छी गृहिणी
डॉ आरती चंद ने बताया कि मेरे लिए परिवार महत्वपूर्ण है। सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में डॉक्टर थी, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए नौकरी छोड़ दी। सासू मां नहीं थीं। लिहाजा, घर की पूरी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। संयुक्त परिवार है। हर किसी की सुविधा का ख्याल रखना पड़ता है। पति हर सुख-दुख में साथ रहते हैं। कारोबार के सिलसिले में व्यस्तता ज्यादा रहती है, फिर भी मेरे लिए समय निकालते हैं। बड़ी बेटी दिल्ली में पैदा हुई थी तो सब कुछ छोड़कर दो दिन साथ रहे थे।
मेरी तो मैनेजर हैं आरती
होटल रेडिसन ब्लू के प्रबंध निदेशक अरुण चंद ने बताया कि पांच सितारा होटल का प्रबंधन भले ही मैं संभालता हूं, लेकिन मेरी असली मैनेजर तो पत्नी आरती चंद ही हैं। आरती ने सब कुछ संभाल लिया है। घर-परिवार व रिश्तेदार का अच्छे से ख्याल रखती हैं। इसलिए निश्चिंत होकर कारोबार में लगा रहता हूं। सामाजिक कार्यक्रम, धर्म-कर्म सब कामों में वह आगे रहती हैं। उनका त्याग बहुत बड़ा है। परिवार की खातिर डॉक्टरी छोड़ दी। मैं, हमेशा उनके साथ हूं। वह भी हमेशा मेरे हर सुख-दुख में साझीदार रहती हैं।
पति रहें निश्चिंत इसलिए संभालती हूं घर
पल्लवी अग्रवाल ने कहा कि पति मयंक पर कारोबार की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें कोई चिंता न हो इसलिए घर के हर दायित्व से उन्हें मुक्त रखती हूं। बावजूद इसके वह मेरा और परिवार का पूरा ख्याल रखते हैं। इतने व्यस्त दिनचर्या में भी मेरे लिए और परिवार के लिए समय निकालते हैं। परिवार के लिए वह गाइड हैं, जो हर परिस्थिति को अच्छे ढंग से संभालते हैं। वह ख्याल रखने वाले पति, जिम्मेदार पिता, आज्ञाकारी बेटा और अच्छे नागरिक हैं। उनका साथ मुझे हमेशा शंति, गर्व और सुरक्षा का अहसास देता है।
मेरी पत्नी मेरी दोस्त, मेरा संबल
गैलेंट इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मयंक अग्रवाल ने कहा कि पल्लवी मेरे के लिए पत्नी से ज्यादा दोस्त, संबल और वह सहारा हैं जो मेरी हर जरूरत और अच्छे बुरे समय में साथ होता है। उनके बिना जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकता। मैं लगातार सफलता के सोपान चढ़ता रहा तो उसके पीछे पल्लवी की मेहनत शामिल है। मुझे कभी भी घर-परिवार की चिंता नहीं करनी पड़ी, जिससे कारोबार को समय दे सका। मेरी ईश्वर से कामना है कि पल्लवी हमेशा खुश रहें और मुझे उनका साथ मिलता रहे।
परिवार की जिम्मेदारी निभाने में मिलती है खुशी
स्वाति अग्रवाल ने कहा कि पति और परिवार की कामयाबी को अपनी कामयाबी मानती हूं इसलिए परिवार की जिम्मेदारी निभाने में खुशी महसूस करती हूं। एक अच्छी गृहिणी की तरह मेरा भी लक्ष्य सास-ससुर की सेवा, पति का साथ और बच्चों का अच्छा पालन-पोषण करना, शिक्षा देना है। किसी मूवी का डायलॉग है कि महिला की सफलता में पुरुष का हाथ होता है, मैं अपनी सफलता का पूरा श्रेय पति विकास को देती हूं।
मैं दूसरों का कॅरियर बना रहा हूं, पत्नी मेरे बच्चों का
मोमेंटम बेतियाहाता के निदेशक विकास अग्रवाल ने कहा कि कोचिंग के जरिए मैं सैकड़ों बच्चों का कॅरियर बना रहा हूं, यही वजह है कि अपने बेटे-बेटी को बहुत कम समय दे पाता हूं। निश्चिंत हूं कि पत्नी स्वाति बच्चों की पढ़ाई से लेकर उनके संपूर्ण व्यक्तित्व विकास को समर्पित हैं। घर चलाने के मामले में मैं पूरी तरह उन पर निर्भर हूं। वह मेरे माता-पिता, बच्चों, नाते-रिश्तेदारों को इस तरह संभालती हैं कि मुझे कोई चिंता नहीं रहती। बेटे शुभ और बेटी एश्वी की प्रतिभा संवारने का श्रेय केवल स्वाति को है।