खुद राजघाट पुल से पहले बाएं साइड में भी एक कॉलोनी और मैरिज हाउस बना है, जो कभी अमरूतानी का हिस्सा हुआ करता था। यहां पर लोग बसे और अंदर अमरूतानी से आने वालों से परेशान हुए तो कॉलोनी को अमरूतानी से अलग कर उसे नई पहचान दे दी गई।
एक इलाके ने न्यू ट्रांसपोर्टनगर कॉलोनी से नई पहचान बना ली तो एक हिस्सा अघोरपीठ की वजह से मशहूर हो गया। अब इन दोनों कॉलोनी के रास्तों को बंद कर दिया गया है, ताकि अमरूतानी की ओर से कोई न आ सके और कॉलोनी सुरक्षित रहे।
रामलखन साहनी बताते हैं-पहले जब रास्ता खुला था तो पुलिस वाले अमरूतानी में कार्रवाई करते थे तो इस ओर चले आते थे। कई बार विवाद भी हो चुका है और छींटाकशी जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, लेकिन जब से कॉलोनी के रास्ते को बंद कर दिया गया है, तब से अब यह पूरी तरह से सुरक्षित हो गई है। अब उतनी परेशानी नहीं होती है। कभी कभार सड़क पर इस तरह के लोग दिख जाते हैं, लेकिन पुलिस भी रहती है, तो परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।
अमरुतानी में एक हिस्से में न नाली है न सड़क।
- फोटो : अमर उजाला।
कॉलोनी में सड़क, बिजली सब दुरुस्त
अमरूतानी से अलग होकर बने कॉलोनियों को अब पूरी तरह से व्यवस्थित कर दिया गया है। पुराने अमरूतानी की तरह यहां पर लकड़ी के खंभे और कच्ची सड़क नहीं हैं। बल्कि, पक्का सड़क और व्यवस्थित बिजली के खंभे हैं, जिसकी मदद से अब कोई भी इस हिस्से को यह नहीं कह सकता है कि कभी यह अमरूतानी का हिस्सा रहा हो। आज यह पूरी तरह से व्यवस्थित हो चुका है।
अच्छे लोगों ने बनाया मकान तो बदली सूरत
इस कॉलोनी में व्यापारी, शिक्षक जैसे समाज के अच्छे लोगों ने मकान बनाया तो इसकी सूरत बदल गई है। अब यहां की जमीनें जो कभी 50 हजार रुपये डिसमिल होती थी, वह अब लाखों में पहुंच चुकी है। शहर का हिस्सा होने की वजह से लोग यहां पर तेजी से जमीन की खरीद फरोख्त भी कर रहे हैं। मंगलवार को जाने पर दिखा कि कई लोग अपने मकान का निर्माण भी करवा रहे हैं और तेजी से प्लाटिंग हुई है।