डॉ. तपस कुमार ने बताया कि महिला का दिमाग अब बूढ़ा हो चुका है। नशे के कारण उसके दिमाग की नस में एल्कोहल विथ डिलेरियम बीमारी भी हो चुकी है। इस बीमारी में दिमाग में कुछ भी सुनने और समझने की क्षमता खत्म हो जाती है। यह बीमारी, दिमाग के चारों तरफ की सुनने वाली इंद्रियों को ब्लॉक कर देती है।
ऐसे में मरीज को केवल अपनी ही बात सही लगती है और वह जो सोचता है, उसे ही करने की जी-जान से कोशिश करता है। महिला के साथ भी स्थिति ऐसी हो चुकी है। अब उसे लंबे इलाज की जरूरत वह भी किसी बड़े सेंटर में, जहां पर उसकी सही से देखभाल हो सके।
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ऐसा नहीं किया गया, तो जैसे ही उसे मौका मिलेगा, वह भागकर फिर किसी भी तरह का नशा कर लेगी। बचपन से हुई लापरवाही ही इसकी वजह है। यदि बच्चों को ऐसे मामलों से बचाना है तो उन पर पल-पल नजर रखना जरूरी है। उनकी हर गतिविधि को एक उम्र तक बहुत बारीक नजर और मार्गदर्शन की जरुरत होती है।
5.4 प्रतिशत बेटियां 15 की उम्र से कर रहीं तंबाकू का सेवन
जिले की 5.4 प्रतिशत बेटियां ऐसी हैं, जो 15 वर्ष की उम्र से तंबाकू का सेवन कर रही हैं। जबकि किशोरों का प्रतिशत 44.6 है। इसके अलावा 15 वर्ष की उम्र वाली दो प्रतिशत बेटियां ऐसी हैं, जो शराब का सेवन कर रही हैं। किशोरों की तुलना में यह काफी कम है। 18.9 प्रतिशत किशोर ऐसे हैं, जो 15 वर्ष की उम्र से शराब का सेवन शुरू कर दे रहे हैं। यह आंकड़े नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे पांच के हैं।