डॉ. सुरेखा ने बताया कि शहर सहित गांव के सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों से संपर्क करके उनके शिक्षकों को एम्स में बुलाकर बीमारियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। अगर कहीं पर शिक्षकों की संख्या ज्यादा हैं, तो वहां पर एम्स के डॉक्टर खुद जाएंगे।
शिक्षकों को प्राइमरी हेल्थ केयर के बारे प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे कि किसी बच्चे की तबीयत खराब होने पर उसे प्राथमिक स्तर की देखभाल मिल सके इसके अलावा बच्चों के कार्ड एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन वार्ड से जोड़े जाएंगे।
हर डॉक्टर दो-दो बच्चों को गोद लेगा
डॉ. किशोर ने बताया कि एम्स के सभी डॉक्टर दो-दो बच्चों को गोद लेकर पांच साल तक उनकी देखभाल करेंगे। पांच साल के बाद जब डॉक्टर चले जाएंगे, तो उनकी जगह पर आने वाले दूसरे डॉक्टर बच्चों को गोद लेंगे। इन बच्चों के जरिए डॉक्टर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के फील्ड में भी जाएंगे, इससे नई बीमारियों का भी पता चल सकेगा।
सुपर स्पेशिल्टी ब्लॉक में मिलेगी हर सुविधा
डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि एम्स में सुपर स्पेशिल्टी ब्लॉक डेवलेप किए जाएंगे। इसमें कार्डियोलॉजी, डायलिसिस के यूनिट को विकसित किया जाएगा। बताया कि आईपीडी में 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कोरोना की वजह से काम में थोड़ी देरी हो रही है। मजदूर कम हैं। लेकिन कोशिश है कि जल्द से जल्द आईपीडी की सेवा भी शुरू कर दी जाए।
अगला बैच 125 का होगा
डॉ. सुरेखा ने बताया कि एम्स में एमबीबीएस डॉक्टरों का अगला बैच 125 की संख्या वाला होगा। इससे हम ज्यादा से ज्यादा डॉक्टर देश को दे सकेंगे। कहा कि मौजूदा समय में केवल 50 एमबीबीएस की सीटें हैं। जिन्हें हम बेहतर ट्रेनिंग के साथ पढ़ा रहे हैं। बताया कि जल्द ही इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर की शुरुआत एम्स में होगी।
डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि प्रदेश सरकार एम्स के निर्माण में पूरा सहयोग करेगी। जरूरत के अनुसार जमीन भी मुहैया कराने का उन्होंने आश्वासन दिया है।
जल्द किए जाएंगे हेल्पलाइन नंबर जारी
डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि एम्स अपने मरीजों की सुविधाओं के लिए जल्द ही हेल्पलाइन नंबर जारी करेगा। इस पर मरीज छोटी-मोटी परेशानी होने पर डॉक्टरों से घर बैठे सलाह ले सकते हैं। इसके अलावा लोकल पीएचसी के जरिए भी मरीजों की मदद की जाएगी।