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एम्स : कैंसर के मरीजों को मिल रही दर्द से राहत

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- एम्स : कैंसर के मरीजों में अल्ट्रासाउंड के माध्यम से दर्द की नस को खोजकर किया नष्ट, मरीजों को मिली राहत


गोरखपुर। एम्स में कैंसर मरीजों को उनके अंतिम वक्त में दर्द से राहत मिल रही है। एनेस्थिसियोलॉजी, पेन मेडिसिन और क्रिटिकल केयर विभाग में अल्ट्रासाउंड गाइडेड कैंसर पेन मैनेजमेंट तकनीक के जरिये कैंसर पीड़ितों को राहत दी जा रही है। पहले यह तकनीक एम्स दिल्ली, पीजीआई और एम्स ऋषिकेश जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में उपलब्ध थी। लेकिन अब एम्स में भी इसका उपयोग कर मरीजों को राहत दी जा रही है।
विभाग में पिछले दो वर्षों से कैंसर के ऐसे मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जो अपने जीवन के अंतिम दौर में असहनीय दर्द झेल रहे हैं। विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रविशंकर शर्मा ने बताया कि पेट, लीवर, आंत सहित अन्य कैंसर में यह तकनीक विशेष रूप से कारगर सिद्ध हो रही है। इस तकनीक में अल्ट्रासाउंड मशीन की मदद से शरीर के कैंसर से प्रभावित अंग के अंदर की उस नस को पहचाना जाता है, जो मस्तिष्क को दर्द का संकेत भेजती है। इसके बाद सुई की मदद से उस विशेष नस में अल्कोहल व फिनोल जैसी दवाएं डाली जाती हैं, जिससे वह नस स्थायी रूप से निष्क्रिय हो जाती है। इस प्रक्रिया में मरीज को कोई बड़ी सर्जरी नहीं करनी पड़ती, और न ही उसे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है।
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अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया भारत का प्रतिनिधित्व
विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रविशंकर शर्मा ने 10 से 12 अप्रैल तक रोम इटली में आयोजित हुए “रोम पेन डेज 2025” के पांचवें संस्करण में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर “अल्ट्रासाउंड-गाइडेड कैंसर पेन मैनेजमेंट” विषय पर विचार साझा किया। इसमें 25 से अधिक देशों के 1500 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। वे इस मंच पर आमंत्रित एकमात्र भारतीय विशेषज्ञ थे। कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने डॉ. शर्मा को बधाई देते हुए कहा डॉ. शर्मा के योगदान गोरखपुर जैसे क्षेत्र में दर्द चिकित्सा और उपशामक देखभाल सेवाओं की नींव रखी है।
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कैंसर के साथ अन्य बीमारियों में भी उपयोगी
डॉ. शर्मा ने बताया कि यह तकनीक कैंसर के साथ जीवनभर रहने वाली बीमारियों जैसे ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया (चेहरे में बिजली की तरह चुभने वाला दर्द), सर्वाइकल, फ्रोजेन शोल्डर और लंबर डिस्क प्रॉब्लम, घुटनों के दर्द जैसी स्थितियों में भी बेहद उपयोगी है। इनमें सामान्य दवाओं से दर्द का स्थायी समाधान नहीं मिल पाता। ऐसे में इस तकनीक के माध्यम से दर्द से राहत मिल सकता है।
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