आगरा के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उप निदेशक ने देहदान का लिया संकल्प
गोरखपुर। जीते जी लोगों की सेवा तो कर ही रहे हैं। जिंदगी के अंतिम पलों में भी समाज की कुछ बेहतरी हो जाए इस विचार के साथ विजय प्रताप यादव ने देहदान का संकल्प लिया है। वे आगरा में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उप निदेशक पद पर कार्यरत हैं। विजय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक को पत्र लिखा है। पत्र में मेडिकल शोध छात्रों के लिए सभी अंगों को किसी दूसरे व्यक्ति में ट्रांसप्लांट के लिए शरीर को दान करने का जिक्र उन्होंने किया है।
जानकारी के मुताबिक विजय प्रताप यादव शहर के रामगढ़ थाना क्षेत्र के रसूलपुर के शिवपुरी कॉलोनी के निवासी हैं। निदेशक को भेजे पत्र में आग्रह किया है कि मृत्यु के पश्चात उनका संपूर्ण शरीर काशी हिंदू विश्वविद्यालय चिकित्सा संस्थान को दान में अर्पित किया जाए। ताकि शोध के लिए शरीर काम आ सके। साथ ही संपूर्ण शरीर का कोई भी अंग जरूरत के अनुसार जरूरत मंद को दे दें। उसके बाद अपशिष्ट पदार्थ मेरे परिवार को सुपुर्द कर दिया जाए जिससे की अंतिम संस्कार किया जा सके। बताया है कि ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव है। विजय ने परिजनों से भी निवेदन किया है कि उनकी मौत के बाद किसी भी तरह का मृत्यु भोज न किया जाए। बल्कि स्वर्गवासी हो चुके पितृजन और मातृजन का स्मरण करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर एवं निर्बल व्यक्तियों को दान दिया जाए।
पत्नी का मिला साथ
विजय प्रताप ने बताया कि पत्नी अर्चना यादव वाराणसी में शिक्षिका हैं। उन्हें इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया। बताया कि इस फैसले का स्वागत करते हुए खुशी जताई है। विजय ने बताया कि एक बेटी है और दो बेटे हैं। पिता गणेश प्रसाद यादव गोरखपुर में ही रहते हैं।
अचानक सुबह मन में आया विचार, कर दी रजिस्ट्री
विजय प्रताप ने बताया कि वे सुबह रोज टहलने जाते हैं। आगरा में शुक्रवार को टहलने के दौरान ख्याल आया और दोपहर में पत्र तैयार करते हुए बीएचयू के निदेशक को रजिस्ट्री कर दी। बताया कि 2004 में पीसीएस में चयन हुआ था। इसके बाद से लगातार नौकरी जारी है। 17 साल की नौकरी में अब तक 11 बार तबादला हो चुका है।