इसी बीच सुनील अपने दोस्त दुर्गेश के साथ किशोरी के घर पर पहुंचा। दुर्गेश बाहर खड़ा होकर निगरानी कर रहा था। सुनील ने किशोरी से शारीरिक संबंध बनाया और जाने लगा। इस पर किशोरी शादी का दबाव बनाने लगी तो उसने किशोरी को पास में पड़े तख्त पर पटक दिया और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद बाहर खड़े दुर्गेश को बुलाया। फिर दोनों ने मिलकर फंदे से शव को लटका दिया। दरवाजे की कुंडी को अंदर से बंद कर रोशनदान के रास्ते दोनों फरार हो गए थे। पुलिस भी इसे खुदकुशी मान रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हत्या की पुष्टि हो गई। पुलिस ने आरोपियों को जेल भिजवा दिया।
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घटना के बाद मौके पर एसपी नार्थ जांच के लिए गए थे, उसी समय रोशनदान के छड़ हटे मिले थे। फिर पिता ने खुदकुशी के लिए उकसाने का जो केस दर्ज कराया, उसमें लिखी गई बात से आधी सच्चाई सामने आ गई है। दरअसल, किशोरी के पिता ने जो केस दर्ज कराया, उसमें लिखी गई बातों की जानकारी पत्नी ने ही दी थी।
इससे घटना में शामिल लोगों का पता चल गया, बस साक्ष्य जुटाना था। सीडीआर की मदद से पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया तो मां पर ही संदेह हो गया। मां पुलिस ने हिरासत में लिया। फिर उसने पूछताछ में इस बात को स्वीकार कर लिया किया सुनील से उसकी दोस्ती थी और अब बेटी से भी हो गई थी। इसके बाद ही सुनील को पुलिस ने पकड़ा और पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।