सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद तेजाब हर जगह आसानी से बिना पहचान पत्र के उपलब्ध है। सुप्रीम कोर्ट की चिंता को गोरखपुर प्रशासन ने कभी गंभीरता से नहीं लिया, नतीजा एसिड अटैक की घटनाएं जब-तब सामने आती ही रहती हैं। शुक्रवार को शहर में एसिड अटैक की घटना के बाद अमर उजाला ने शहर में एसिड बिक्री की व्यवस्था का जायजा लिया तो सामने आया कि जितना एसिड चाहिए, पैसे चुकाइए और आराम से ले जाइए।
विभागों को भी नहीं पता बिकने और लाइसेंस जारी करने का तरीका
सुप्रीम कोर्ट ने भले ही तेजाब की बिक्री के लिए गाइड लाइन जारी की हो, लेकिन स्थानीय प्रशासन इसे लेकर अब भी ऊहापोह में है। अग्निशमन विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि इसका लाइसेंस जारी करने का अधिकार खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के पास है। लेकिन, वहां पता करने पर बताया गया कि यह तो ड्रग इंस्पेक्टर के अधीन आता है। ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने ऐसी किसी जानकारी से इंकार किया। वहीं पुलिस विभाग से जुड़े लोगों से जानकारी चाही गई तो उन्होंने भी इस विषय में गाइड लाइन की जानकारी नहीं होने की बात कही।
जनहित याचिका पर दिया था निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में दिल्ली की किशोरी पर हुए एसिड अटैक के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की थी। सुनवाई के बाद सभी राज्य सरकारों को निर्देश जारी किया किया गया था कि राज्य सरकारें एसिड बिक्री के लिए सख्त नियम बनाएं, जिससे अराजक तत्वों के हाथ में एसिड न पहुंचे।