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गोरखपुर: सरकारी बसें जितनी गड़बड़ाती हैं, उतना ज्यादा दौड़ती हैं निजी बसें

Tue, 13 Jun 2023 03:44 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर डिपो एआरएम एके सिंह ने कहा कि गर्मी में एसी बसों में दिक्कत ज्यादा आती है। ज्यादातर शिकायतें बस के कम ठंडा होने की होती हैं। एसी बस में गैस डालने का काम एक से दो दिन में हो जाता है, कुछ एसी बसें पुर्जों के अभाव में खड़ीं हैं।
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गोरखपुर रोडवेज। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सरकारी बसें जितनी गड़बड़ाती हैं, निजी बसें उतनी ज्यादा दौड़ती हैं। लिहाजा उनकी मोटी कमाई भी होती है। इन दिनाें कुछ ऐसा ही हो रहा है। रोडवेज की एसी बसें खराबी के नाम पर कार्यशाला में खड़ी कर दी जा रही हैं। वहीं, निजी एसी बसें बिना किसी दिक्कत के फर्राटा भर रहीं हैं। चाहे लखनऊ जाना हो या कानपुर, दिल्ली हो या जयपुर सभी जगहों के लिए निजी बसें शहर के नौसड़ के आसपास स्थित पेट्रोल पंप से मिल जा रही हैं।

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वर्तमान में गोरखपुर राप्तीनगर डिपो के पास 43 एसी बसें हैं। इनमें पांच पिंक और बाकी 38 जनरथ बसें शामिल हैं। 38 जनरथ बसों में से सात बसें पुर्जों के अभाव में महीनों से खराब पड़ीं हैं। जबकि भीषण के गर्मी के कारण बस के कम ठंडा होने की शिकायत पर भी बसें मरम्मत के लिए कार्यशाला में पहुंच जा रही हैं, जिन्हें ठीक होने में आठ से 10 दिन का समय लग जा रहा है।

वहीं, एसी में गैस डालने के लिए भी हर दिन बसें कार्यशाला में पहुंच रही हैं, इनमें एक से दो दिन का समय लग रहा है। ऐसे में औसतन 38 में 12 से 15 बसें कार्यशाला में खड़ी रह रही हैं। रोडवेज की लापरवाही का फायदा निजी बस चालक उठा रहे हैं।
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नौसड़ चौराहे से पहले स्थित भारत पेट्रोल पंप से जयपुर की एसी स्लीपर बसें और नौसड़ चौराहे से आगे स्थित पेट्रोल पंप से लखनऊ, कानपुर और दिल्ली के लिए बसें मिल रही हैं। जो रोडवेज की बसों की तुलना में कम समय और कम किराए में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचा रही हैं। लेकिन, रोडवेज के पास तमाम तरह के संसाधन होने के बावजूद रोडवेज की बसें निजी बसों से मुकाबला नहीं कर पा रहीं।

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निजी बस से दिल्ली जा रहे यात्री अवधेश ने बताया कि वह निजी बस से ही सफर करते हैं। रोडवेज की बसें आरामदायक नहीं होती हैं और समय भी ज्यादा लगाती हैं। कानपुर जाने वाले सुनील ने बताया कि रोडवेज की बसों में किराया अधिक लगता है, निजी बस से कानपुर जाने में करीब 200 रुपये की बचत हो जाती है। वहीं, रोडवेज की बसों में बैठकर जाना पड़ता है, लेकिन निजी बसें स्लीपर हैं।

गोरखपुर डिपो एआरएम एके सिंह ने कहा कि गर्मी में एसी बसों में दिक्कत ज्यादा आती है। ज्यादातर शिकायतें बस के कम ठंडा होने की होती हैं। एसी बस में गैस डालने का काम एक से दो दिन में हो जाता है, कुछ एसी बसें पुर्जों के अभाव में खड़ीं हैं।

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