हालांकि, किसानों का कहना है कि अगर यदि अधिकारी चाहेंगे तो उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। आगे अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेगे। अधिकारियों का कहना है कि किसानों की मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाएगा।
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किसान अशोक सहानी ने कहा कि भू अर्जन अधिनियम की धारा 26 व धारा 38 के तहत अधिगृहित भूमि के मुआवजे का निर्धारण विक्रय पत्रों के औसत और सर्किल रेट में जो अधिकतम होता है। उस पर दिया जाता है। धारा 38 के अनुसार मुआवजे के पूर्ण भुगतान के बाद ही कब्जा किया जा सकता है, लेकिन यहां कार्यदायी संस्था जबरन निर्माण करना चाहती है।
किसान विश्वामित्र ने कहा कि भू अर्जन अधिनियम के तहत खड़ी फसल नुकसान होने पर मुआवजा देने के बावजूद हीलाहवाली की जा रही है। कार्यदायी संस्था ने बिना किसी सूचना के किसानों के सैकड़ों एकड़ की फसल पर जेसीबी चला दी थी।