भवन में कुल 12 दुकानें हैं, जिनमें से कुछ में गोदाम भी बनाए गए थे। इनमें दो चचेरे भाइयों की फर्में संचालित हो रही थीं। पहली फर्म हरीश गुप्ता की थी, जो सोहनलाल सियाराम ट्रेडर्स के नाम से कई वर्षों से चल रही थी। हरीश गुप्ता के बेटे अविनाश ने बताया कि यह कारोबार तीन पीढि़यों से परिवार की ओर से संचालित किया जा रहा था।
कोतवाली थानाक्षेत्र के रायगंज में मंगलवार देर शाम एक नहीं हैंडलूम की दो फर्मों की दुकान व गोदाम में आग थी। आग से करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक का सामान जलने का अनुमान है। आग इतनी भयंकर थी कि गोदाम, दुकानों और मकान की दीवारें तक चिटक गईं।
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जबकि पास के एक मकान को भी नुकसान पहुंचा। घटना के समय दोनों फर्मों के परिवार ऊपर बने कमरों में मौजूद थे, जिन्होंने धुआं उठता देख आपातकालीन सीढ़ी के सहारे बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
जानकारी के अनुसार, भवन में कुल 12 दुकानें हैं, जिनमें से कुछ में गोदाम भी बनाए गए थे। इनमें दो चचेरे भाइयों की फर्में संचालित हो रही थीं। पहली फर्म हरीश गुप्ता की थी, जो सोहनलाल सियाराम ट्रेडर्स के नाम से कई वर्षों से चल रही थी। हरीश गुप्ता के बेटे अविनाश ने बताया कि यह कारोबार तीन पीढि़यों से परिवार की ओर से संचालित किया जा रहा था।
घटना के समय दुकान के ऊपर बने कमरे में हरीश गुप्ता के परिवार की मंजू, सलोनी और विराज गुप्ता मौजूद थे। अचानक गोदाम की ओर से धुआं उठता दिखाई दिया तो परिवार के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने तत्काल आपातकालीन सीढ़ी का सहारा लेकर बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
इसी भवन में दूसरी फर्म अमित गुप्ता की निष्ठा ट्रेडर्स के नाम से संचालित थी। आग लगने के समय अमित की पत्नी दिव्या, उनकी साली रोशनी और तीन बच्चे निष्ठा, गुड्डन और करीब डेढ़ साल का बेटा दुकान के ऊपर बने कमरे में मौजूद थे। धुआं फैलते ही उन्होंने भी आपातकालीन सीढ़ियों के रास्ते बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर शरण ली।
इसबीच आग ने विकराल रूप ले लिया था। गोदाम और मकान से आग की लपटें उठती देख पड़ोसियों ने घटना की सूचना तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को दी। सूचना मिलते ही दमकल की 15 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने की कोशिश शुरू की।
आग इतनी तेज थी कि दमकल कर्मियों को छत पर बने वेंटिलेशन के जाल को उखाड़कर अंदर पानी की बौछार करनी पड़ी। काफी मशक्कत के बाद देर रात करीब दो बजे आग पर काबू पाया जा सका।
बुधवार शाम तक बनी रही आग की तपिश
आग की तपिश इतनी ज्यादा थी कि बुधवार देर शाम तक मकान और दुकानों में गर्मी बनी रही। इसके बाद मकान मालिक ने नगर निगम कर्मचारियों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू कराया। आंख के सामने करोड़ों रुपये का माल मलबे में फेंका जाता देख आंसू छलक उठे। आसपास के लोग व रिश्तेदार उनका ढांढ़स बढ़ाते नजर आए।
पड़ोसी के मकान की भी चिटकी दीवारें, घर में भर गया था धुआं
आग की लपटों का असर पड़ोस के मकानों तक भी पहुंचा। पड़ोस में रहने वाले युवराज के घर की दीवारें कई जगह से चिटक गईं। घटना के समय युवराज अपनी पत्नी ज्योति गुप्ता और दो बेटियों युविका और लवी के साथ घर में थे। आग की स्थिति देखकर उन्होंने तुरंत घर से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। बिजली के तार तक पिघल गए थे।
एक सप्ताह पहले मंगाया था स्टाक
फर्म संचालकों ने बताया कि नवरात्रि के चलते दोनों फर्मों में हैंडलूम का बड़ा स्टॉक मंगाकर रखा था। करीब एक सप्ताह पहले ही नया माल मंगाया गया था, जो अधिकतर गोदाम में रखा हुआ था। आग लगने से यह पूरा सामान जल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की लपटें इतनी ऊंची उठ रही थीं कि दूर से ही धुआं दिखाई दे रहा था। आग से सबसे ज्यादा नुकसान गोदाम और अंदरूनी दुकानों में हुआ, जबकि आगे की दो दुकानों में रखा कुछ सामान सुरक्षित बचा है।