गोरखपुर। राजस्थान से आए युवक रविशंकर शुक्ल से लूट के मामले में आरोपी निलंबित दरोगा शुभम श्रीवास्तव को बड़ा झटका लगा है। प्रभारी अपर सत्र विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) सिद्धार्थ सिंह ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने अपने आदेश में मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिसकर्मी ही अपराध में शामिल होंगे, तो आम जनता का विश्वास पूरी तरह से टूट जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपितों ने पीड़ित को पिस्टल रखने में जेल भेजने की धमकी देकर वारदात को अंजाम दिया, जो अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
गौरतलब है कि पांच अगस्त 2025 को मूलत: बेलीपार क्षेत्र में रहने वाले रविशंकर शुक्ल के साथ राजघाट पुल पर हुई घटना में शामिल तत्कालीन नौसड़ चौकी प्रभारी रहे शुभम श्रीवास्तव (निलंबित दारोगा), महिला दारोगा आंचल, आरक्षी प्रवीण यादव, सुभाष यादव और राजेश चौधरी की लोकेशन एक जगह पाई गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि वारदात के बाद सभी आरोपियों ने एक साथ अपने मोबाइल फोन स्विच आफ कर लिए थे, जिससे संदेह और गहरा गया। पीड़ित ने अपने बयान में बताया था कि घटना के बाद जब वह सूचना देने पुलिस चौकी पहुंचा, तो वहां वही लोग बैठे मिले, जिन्होंने उसके साथ लूट की थी। इस बयान को भी अदालत ने गंभीरता से लिया।
सरेंडर करने के बाद आरोपी को जमानत मिलने की उम्मीद थी लेकिन अदालत ने साफ कर दिया कि इस तरह के मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती। आदेश में कहा गया कि आरोपियों का कृत्य न केवल आपराधिक है, बल्कि पुलिस व्यवस्था की साख पर भी सीधा आघात करता है। कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी माना कि मामले में प्रथम दृष्टया साक्ष्य मजबूत हैं और आरोप गंभीर हैं, इसलिए जमानत दिए जाने का कोई आधार नहीं बनता।