सरकारी कागजों में जिले में कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या 848 दर्ज है, लेकिन 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद के लिए अब तक 1832 लोगों के परिजनों ने आवेदन किया है। इस तरह जिले में कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या दर्ज नामों से दोगुना से अधिक हो गई है। प्रशासन इन लोगों का सत्यापन कराकर भुगतान कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि अब भी करीब 500 आवेदन पाइपलाइन में हैं।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार की ओर से कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 50-50 हजार की आर्थिक मदद दी जा रही है। इसके लिए प्रशासन की ओर से आवेदन मांगे गए हैं। अब तक सरकारी आंकड़ों में दर्ज 848 नामों के अलावा 984 लोगों के परिजनों की तरफ से आर्थिक मदद के लिए आवेदन किया जा चुका है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक करीब 500 आवेदन अब भी पाइपलाइन में हैं। इनका सत्यापन आदि कराया जा रहा है।
हालांकि शासन को भी इसका अंदेशा था कि कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या दर्ज आंकड़ों से अधिक हो सकती है। यही वजह है कि सूची में दर्ज 848 लोगों के परिवार को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने के लिए 4.24 करोड़ रुपये तो उपलब्ध कराए ही गए हैं। अलग से जुड़ने वाले नामों के लिए भी पांच करोड़ रुपये दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि कोरोना काल में बहुत से ऐसे लोग थे जो संक्रमित होकर घर पर ही जान गंवा बैठे। बहुत से ऐसे हैं जिनकी एंटीजन जांच ही हो पाई थी और उनकी हालत अचानक खराब होने से वे गुजर गए। ऐसे केसों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन तक नहीं पहुंच सकी, जिस वजह से सरकारी कागजों में उनके नाम कोरोना से मरने वालों की सूची में नहीं दर्ज हो सके।