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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: गोरखपुर में 5.91 लाख किसान, फसल बीमा में 34 हजार का ही पंजीकरण

Sat, 25 Dec 2021 01:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

अधिकतर किसानों का दावा है कि उन्हें फसल बीमा योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। कई किसानों का कहना है कि योजना का लाभ नहीं मिलता इसलिए पंजीकरण नहीं कराया।
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गोरखपुर के किसान। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में 5.91 लाख किसान हैं, लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 34 हजार किसानों ने ही पंजीकरण कराया है। अधिकतर किसानों का कहना है कि उन्हें इस योजना की जानकारी ही नहीं है। कई किसानों का कहना है कि बीमा कराने के बाद भी फसल के नुकसान का मुआवजा नहीं मिलता इसलिए नहीं कराया पंजीकरण।  
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बता दें कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की जगह वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई थी। योजना का लाभ आम किसानों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने इसे किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ दिया। बाद में किसानों की आपत्ति के बाद इसे ऐच्छिक कर दिया गया। पिछले साल सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ पाने वाले किसानों का किसान क्रेडिट कार्ड बनाने व उनको फसल बीमा योजना में शामिल करने का निर्देश दिया। इस साल आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के दौरान इस योजना को प्रचार-प्रसार के लिए विशेष तौर पर चुना गया। पूरे साल अभियान चला। इसके बावजूद केवल 34 हजार किसानों का ही पंजीकरण इस योजना में हो पाया।
 

सीडीओ भी जता चुके हैं नाराजगी

फसल बीमा योजना का पंजीकरण नहीं बढ़ने पर सीडीओ नाराजगी जता चुके हैं। तीन दिन पहले विकास भवन में हुई फसल बीमा योजना की समीक्षा के दौरान कृषि विभाग की तरफ से बताया गया कि बैंक इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं। सीडीओ ने इस पर बैंक अफसरों को भी इस कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया।
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कटी फसल पर भी मिलता है लाभ

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ खेत में खड़ी फसल के अलावा कटने के बाद सूखने के लिए रखी गई फसल पर भी मिलता है। फसल बीमा योजना के जिला प्रबंधक धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा बताते हैं कि असफल बुवाई (बोए गए बीज से पौधा नहीं निकलने), फसल अवधि में प्राकृतिक आपदा से नुकसान तथा कटाई के उपरांत वास्तविक उपज में निश्चित उपज की तुलना में कमी की स्थिति में भी लाभ मिलता है। ओलावृष्टि, जलभराव, भूस्खलन, बादल फटने व बिजली से हुई क्षति पर मुआवजा का प्रावधान है। अगर फसल कटने के बाद सूखने के लिए रखी है और 14 दिन के अंदर ओलावृष्टि, चक्रवात या बेमौसम बारिश होती है तो क्षतिपूर्ति मिलती है। इसके लिए किसान को 72 घंटे के अंदर सूचना देनी होती है।
 

कहीं से कर सकते हैं पंजीकरण

फसल बीमा योजना के लिए किसान कहीं से भी पंजीकरण कर सकते हैं। जो किसान इंटरनेट का उपयोग करते हैं, वे स्वत: फसल बीमा योजना की वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। जनसेवा केंद्रों पर भी पंजीकरण होता है। कृषि विभाग के दफ्तर में भी किसान पंजीकरण करा सकते हैं।
 
जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि फसल बीमा योजना किसानों के हित में चलाई गई अच्छी योजना है। इस साल जिले में 5705 किसानों में तीन करोड़ 55 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का वितरण किया गया। ये वे किसान हैं, जिनकी फसल बाढ़ से बर्बाद हुई थी। आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह बेहतर विकल्प है। 31 दिसंबर तक किसान इस योजना में पंजीकरण करा सकते हैं।
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किसान बोले

बड़हलगंज के भैंसहट निवासी रामसमुझ मौर्य ने बताया कि जानकारी के अभाव में पंजीकरण नहीं करा पाए। कृषि विभाग के जिम्मेदार कभी गांव में नहीं आते न ही सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हैं। जागरूकता के अभाव में कछार क्षेत्र के 40 से अधिक गांवों के किसानों ने बीमा नहीं कराया है।
 
बड़हलगंज के ददरी निवासी जनार्दन शाही ने बताया कि मेरे किसान क्रेडिट कार्ड से फसल बीमा योजना के लिए हर बार किस्त कट जाती थी, लेकिन कोई लाभ नहीं मिलता था। हर वर्ष फसल बाढ़ में डूबकर बर्बाद होती है। इस वर्ष भी साढ़े पांच बीघा धान की फसल डूब गई। इस बार पंजीकरण नहीं कराया हूं।
 
कैंपियरगंज के खजुरगांवा निवासी इंद्रजीत पांडेय ने बताया कि फसल बीमा योजना के तहत पिछली बार पंजीकरण कराया था। बाढ़ में फसल बर्बाद हुई तो तमाम औपचारिकताएं पूरी कराई गईं। परंतु लाभ नहीं मिला। राजस्वकर्मी बता रहे हैं कि सूची भेजी गई है। अभी कुछ लोगों को लाभ मिल पाया है। हमें लाभ नहीं मिला, इसीलिए इस बार पंजीकरण नहीं कराया।
 
कैंपियरगंज के बरईपार निवासी रामहित ने बताया कि फसल बीमा योजना का पंजीकरण कराने के लिए सरकारी स्तर पर उचित व्यवस्था नहीं है। किसानों के पास न तो इतने संसाधन हैं और न वे इतने विशेषज्ञ कि स्वत: पूरी प्रक्रिया पूर्ण कर लें। जनसेवा केंद्र पर पंजीकरण के लिए पैसा देना पड़ता है। इसीलिए पंजीकरण नहीं कराया।
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