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सख्ती: गोरखपुर में डीएम के निर्देश पर हटाई जाएंगी 62 आशा बहुएं, वजह जान लें

Fri, 12 Nov 2021 01:46 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

डीएम विजय किरन आनंद कई बार आशा बहुओं और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ बैठक कर बेहतर काम करने का निर्देश दे चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी 14 ब्लॉक की 62 आशा बहुएं काम नहीं कर रहीं थीं।
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डीएम विजय किरन आनंद। - फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर के डीएम विजय किरन आनंद ने जिले के 14 ब्लॉकों में तैनात 62 आशा बहुओं की सेवा समाप्त करने का निर्देश दिया है। बार-बार चेतावनी के बाद भी काम में लापरवाही पर यह कार्रवाई की जा रही है। डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने इनकी सेवा समाप्ति की तैयारी शुरू कर दी है।
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डीएम विजय किरन आनंद कई बार आशा बहुओं और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ बैठक कर बेहतर काम करने का निर्देश दे चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी 14 ब्लॉक की 62 आशा बहुएं काम नहीं कर रहीं थीं। इनके क्षेत्र में लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं के काम में लापरवाही मिल रही थी। वैक्सीन से लेकर सामान्य टीकाकरण और बच्चों के टीकाकरण में भी कमी दर्ज की गई। इसे देखते हुए डीएम ने इन 62 आशा बहुओं की सेवा समाप्त करने का निर्देश दिया है। सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि यह 62 आशा बहुएं काम में लगातार लापरवाही कर रहीं थीं। इनकी सेवा समाप्ति की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई डीएम के निर्देश पर की गई है।
 
इन ब्लॉकों की आशा बहुओं की होगी सेवा समाप्ति
पिपरौली-10, भटहट एक, खोराबार और उरुवा में दो-दो, गगहा पांच, सरदारनगर तीन, ब्रह्मपुर दो, सहजनवां एक, डेरवा-13, खजनी एक, बेलघाट एक, गोला तीन, कौड़ीराम-12, कैंपियरगंज छह।  
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जल्द से जल्द मिले प्रोत्साहन राशि : चंदा देवी
ऑल इंडिया आशा बहू कार्यकर्ता कल्याण सेवा समिति की अध्यक्ष चंदा यादव ने बताया कि प्रोत्साहन राशि के लिए पिछले दिनों धरना-प्रदर्शन किया गया था। डीएम और सीएमओ के वार्ता करने के बाद प्रदर्शन को खत्म किया गया था। वार्ता के बाद भी अब तक प्रोत्साहन राशि पर कोई निर्णय नहीं हो सका है। शासन से मांग की कि आशा और आशा संगिनी की शैक्षिक योग्यता भविष्य में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की जाए। चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के तहत वेतनमान दिया जाए। आशा के सहयोग के लिए प्रत्येक गांव में आशा सहायिका का पद सृजित किया जाए। उपकेंद्रों पर आशाओं के लिए अलग से कमरा रखा जाए। अगर यह सब मांगें नहीं मानी गईं तो संगठन आंदोलन करेगा।
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