डीएम के. विजयेंद्र पांडियन।
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गोरखपुर में प्रस्तावित वेटनरी कॉलेज के लिए जिला प्रशासन ने अब तीसरी जगह जमीन चिह्नित की है। देवरिया बाईपास के किनारे तालकंदरा की 52 एकड़ जमीन इस कॉलेज के लिए दी जाएगी। निचला इलाका होने के बाद भी प्रशासन का दावा है कि कॉलेज के लिए जो सरकारी जमीन चिह्नित की गई है वह ताल से काफी दूर है और वहां पानी नहीं लगता।
एक ही जगह पर पर्याप्त जमीन मिल जाने की वजह से वहां प्रशासनिक भवन के साथ ही चारागाह भी बन सकेगा। मुख्य मार्ग से जुड़ा होने के कारण आवागमन में भी आसानी रहेगी। वेटनरी कॉलेज के लिए प्रशासन की तरफ से पहले चरगांवा में जमीन उपलब्ध कराई गई थी। मगर वहां जगह पर्याप्त नहीं होने की वजह से चारागाह के लिए दूसरी जगह जमीन तलाशी जा रही थी। चरगांवा की जमीन पशुपालन विभाग के नाम दर्ज भी की जा चुकी है।
मगर इसी बीच टिकरिया के पास बासस्थान में 100 एकड़ से अधिक जमीन चिह्नित की गई। वहां आयुष विश्वविद्यालय व वेटनरी कालेज एक साथ बनाने की योजना थी। पर, कुछ दिनों बाद उस जमीन पर वन विभाग ने अपना दावा कर दिया।
जिसके बाद प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय के लिए भटहट क्षेत्र में 52 एकड़ से अधिक सीलिंग की भूमि चिह्नित कर कब्जे में ली गई। वेटनरी कॉलेज को लेकर जमीन की तलाश चल रही थी जो अब देवरिया बाईपास के पास ताल कंदरा में आकर खत्म हुई है। प्रापर्टी डीलरों ने आसपास बड़े पैमाने पर प्लाटिंग की है लेकिन प्रशासन का दावा है कि कॉलेज के लिए चिह्नित सरकारी जमीन पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त है।
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि आयुष विश्वविद्यालय के बाद अब वेटनरी कॉलेज के लिए भी जमीन की तलाश कर ली गई है। देवरिया बाईपास के किनारे सदर तहसील क्षेत्र के तालकंदरा में 52 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। इसे जल्द ही संबंधित विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।