विनियमितिकरण की 2500 एकड़ जमीन पर हजारों की संख्या में निर्माण की वजह से पिछले तीन दशक से अधिक समय से गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के माथे पर अवैध निर्माण में अव्वल रहने का लगा आ रहा दाग अब धुल जाएगा। मंगलवार को जीडीए बोर्ड बैठक में विनियमितिकरण की जमीन को नियमित करने के प्रस्ताव पर मंजूरी मिल गई।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि इससे 50 से 60 हजार परिवारों यानी करीब 2.50 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। जल्द ही प्राधिकरण द्वारा विनियमितिकरण की जमीनों पर हुए निर्माण को नियमित करके ध्वस्तीकरण के आदेश भी वापस लिए जाने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में मानचित्र भी स्वीकृत हो सकें।
उपाध्यक्ष ने बताया कि विनियमितिकरण की जमीन होने की वजह से यहां हुए निर्माण का मानचित्र नहीं स्वीकृत हो सकता था। कंपाउंडिंग भी नहीं हो सकती थी। यही वजह है कि इन जमीनों पर हुए निर्माण को अवैध की श्रेणी में दर्ज किया गया है। 25 हजार से अधिक निर्माण के तो ध्वस्तीकरण के आदेश भी हो चुके हैं। ऐसे में अब इन सभी संबंधित लोगों को राहत मिल जाएगी।
इस मुद्दे को लेकर कमिश्नर रवि कुमार एनजी, डीएम कृष्णा करूणेश के साथ जीडीए उपाध्यक्ष की पिछले तीन महीने से कई बैठकें हुईं विनियमितिकरण की जमीन को नियमित करने के विकल्प तलाशे गए और फिर मुख्यमंत्री के भी संज्ञान में लाते हुए सहमति ली गई। लंबे समय से चला आ रहा प्रयास मंगलवार को जीडीए बोर्ड बैठक में अंजाम तक पहुंच सका।
अवैध निर्माण में प्रदेश में पहले पायदान पर था जीडीए
जनवरी 2023 में आवास विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अवैध निर्माण के मामले में जीडीए, पूरे प्रदेश में पहले पायदान पर था। यहां 29,123 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए थे। आगरा दूसरे और इलाहाबाद तीसरे नंबर पर है। हालांकि यह पहला मौका नहीं था जब अवैध निर्माण की सूची में गोरखपुर का नाम पहले नंबर या टॉप टेन में आया था।
प्राय: समीक्षा में जीडीए दूसरे, तीसरे या पांचवे नंबर पर बना रहता है। पिछले साल जुलाई में हुई अवैध निर्माण की समीक्षा में भी प्राधिकरण दूसरे पायदान पर था। इसकी सबसे बड़ी वजह प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाली 2500 एकड़ की विनियमितिकरण की जमीन है। जीडीए के मुताबिक नई महायोजना 2031 के प्रारूप पर मिली करीब 11, 797 आपत्तियों में करीब 3500 आपत्तियां विनियमितिकरण की जमीन को नियमित करने के लिए आई थीं।
जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि साढ़े तीन दशक से विनियमितिकरण की 2500 एकड़ पर निर्माण की वजह से अवैध कॉलोनी का दंश झेल रहे लोगों को अब राहत मिल जाएगी। इन जमीनों पर रह रहे 50 से 60 परिवारों यानी 2.50 लाख लोग लाभान्वित होंगे। जिन निर्माणों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ है अब उसे भी वापस लिया जाएगा। विनियमितिकरण की वजह से जीडीए, अवैध निर्माण के मामले में अव्वल रहने का दाग भी अब धो सकेगा।