ग्रेड टू एडिश्मल कमिश्नर देवमणि शर्मा ने कहा कि फर्म के कर की जांच जीएसटी ही करेगी, लेकिन इनके द्वारा अवैध तरीके से काले धन को कैसे खपाया जा रहा, लेनदेन आदि की जांच ईडी कर सकता है। जीएसटी में जितने भी पंजीकृत व्यापारी हैं, उसकी जानकारी ईडी को जल्द भेजी जाएगी।
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माफिया से मिलकर काली कमाई खपा रहे कारोबारी
खबर है कि शहर के सराफा और पान मसाला के कुछ व्यापारियों ने अपने काले धन को खपाने के लिए माफिया का सहारा लिया है। दस से 12 वर्ष पहले माफिया के नाम पर महंगी जमीनें अपने फर्जी फर्मों के नाम करवा लीं। इन जमीनों पर कॉप्लेक्स और अन्य भवन का निर्माण करवा दिया। बताया जाता है कि हिंदी बाजार से लेकर गोलघर में कई जमीन और भवनों में ऐसे ही रुपये लगे हैं। ईडी इनके पूरे कनेक्शन की जांच कर सकता है।
जीएसटी की जांच में पिछले दिनों सामने आया कि एक ही फर्म से एक ई-वे बिल के जरिये व्यापारी ने आठ बार में एक करोड़ रुपये से अधिक का पान मसाला मंगवा लिया था। ये तो एक फर्म हुई, जबकि ऐसी कितनी फर्में काली कमाई कर करोड़ों रुपये का हेरफेर करती हैं। ये कारोबारी अपनी फर्म के टर्नओवर से एक नंबर में रुपयों का लेन-देन करते हैं।
लखनऊ का कनेक्शन गोरखपुर से भी
पिछले दिनों आयकर की टीम ने लखनऊ में सराफा कारोबारियों के यहां कार्रवाई की थी। सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान उनके पास से मिले दस्तावेजों में गोरखपुर के हिंदी बाजार से जुड़ाव भी सामने आया था। इसमें एक कारोबारी के व्यावसायिक प्रतिष्ठान में शहर के एक कारोबारी की करीबी सामने आई थी। सूत्र बताते हैं कि साझेदारी के रिकाॅर्ड टीम को मिले हैं।