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Exclusive: गोरखपुर जिले के 125 हिस्ट्रीशीटर सलाखों के पीछे, अपराधियों के घर दस्तक देगी पुलिस

Wed, 19 Jan 2022 01:34 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।

सार

जमानत पर बाहर 1244 हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी बढ़ाई गई। पुलिस गांव में जाकर डुगडुगी पीट कर इनकी करतूत बता रही है।
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प्रतीकात्मक - फोटो : istock
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विस्तार
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गोरखपुर में माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला का साथी सत्यव्रत राय हो या फिर रंगदारी वसूलने वाला हत्याभियुक्त प्रदीप सिंह, सब जेल की सलाखों के पीछे हैं। लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिला है, जब जिले के 125 हिस्ट्रीशीटर एक साथ जेल में बंद हैं। दूसरी तरफ, विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जेल से बाहर आने वाले हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी भी शुरू कर दी गई है।

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जमानत पर रिहा होकर बाहर घूम रहे 1244 हिस्ट्रीशीटरों की सतत निगरानी व आपराधिक संलिप्ता का सत्यापन करके दोबारा जेल भेजने की हिदायत, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने मातहतों को दी है। बुजुर्ग या निष्क्रिय हो चुके 135 हिस्ट्रीशीटरों के घर भी पुलिस दस्तक देगी।
 
जानकारी के मुताबिक, अभी चंद दिनों पहले हिस्ट्रीशीटर पवन सिंह ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर सीएम पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस घटना के बाद ही एसएसपी ने हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी का सत्यापन कराया है। इससे पता चला कि गोरखनाथ पुलिस, पवन सिंह की निगरानी ही नहीं कर रही थी।
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इंस्पेक्टर गोरखनाथ से स्पष्टीकरण मांगने के साथ ही पूरे जिले में हिस्ट्रीशीटरों की सूची तैयार कराई गई। एसएसपी के आदेश पर सभी थानेदार अब हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी शुरू करने के साथ ही थाने के टॉप 10 बदमाशों के गांव घर पर जाकर उनकी करतूत ग्रामीण और पड़ोसियों को बता रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुल 1505 हिस्ट्रीशीटर हैं। इनमें से 135 निष्क्रिय हैं। कुछ उम्र के उस पड़ाव पर हैं कि वे अपराध नहीं कर सकते तो कइयों ने अपराध से तौबा कर लिया है। पुलिस के मुताबिक 1370 हिस्ट्रीशीटर अब भी सक्रिय हैं, इनमें से 125 को पुलिस जेल भेज चुकी है।
 

चौरीचौरा में सर्वाधिक 102 हिस्ट्रीशीटर

जिले के चौरीचौरा थाने में सर्वाधिक 102 हिस्ट्रीशीटर है। इनमें से 12 निष्क्रिय हो चुके हैं। कोतवाली थाने में 46, राजघाट में 49, तिवारीपुर में 47, कैंट में 28, खोराबार में 58, रामगढ़ताल में 20, गोरखनाथ में 62, शाहपुर में 47, कैंपियरगंज में 53, पीपीगंज में 62, सहजनवां में 38, गीडा में 47, चिलुआताल में 63, झंगहा में 82, पिपराइच में 81, गुलरिहा में 46, बांसगांव में 73, गगहा में 79, बेलीपार में 51, गोला में 51, बड़हलगंज में 88, उरुवा बाजार में 40, बेलघाट में 28, खजनी में 75, सिकरीगंज में 48 और हरपुर बुदहट में 39 हिस्ट्रीशीटर हैं।

तब जेल भेजे गए थे वीरेंद्र शाही व हरिशंकर तिवारी

1986 में सीएम वीर बहादुर सिंह ने पूरे प्रदेश में अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए अभियान चलाया था। तब इलाके के एक से एक बड़े बाहुबली जेल गए थे। इनमें हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही भी शामिल थे। यह बात अलग है कि जेल में रहते हुए ही हरिशंकर तिवारी विधायक भी बन गए थे।

ये होते हैं हिस्ट्रीशीटर

बदमाश के आपराधिक इतिहास की फाइल को ही हिस्ट्रीशीट कहते हैं। अपराध की गंभीरता को देखते हुए बदमाशों की निगरानी के लिए हिस्ट्रीशीट खोली जाती है। बदमाश लगातार अपराध कर रहा हो तो निगरानी के लिए यह व्यवस्था होती है। बदमाश को पहले एक्टिव लिस्ट पर लाया जाता है, फिर उसकी निगरानी हिस्ट्रीशीट के माध्यम से होती है। इसके लिए थाने पर फ्लाई सीट रजिस्टर होता है। इसमें हिस्ट्रीशीटरों की इंट्री होती है। हर हिस्ट्रीशीटर की निगरानी के लिए एक-एक सिपाही की ड्यूटी लगती है। नियमों के मुताबिक हिस्ट्रीशीटर को सप्ताह में एक बार थाने या चौकी पर आकर हाजिरी भी देनी होती है। अपराध की गंभीरता के हिसाब से हिस्ट्रीशीट खोली जाती है। मसलन, लूट, हत्या या डकैती जैसे जघन्य अपराध में दो ही केस पर हिस्ट्रीशीट खोली जा सकती है।

 
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जिले के ये हिस्ट्रीशीटर हैं जेल में

जिले के जो कुख्यात हिस्ट्रीशीटर जेल में हैं, उनमें सत्यव्रत राय, प्रदीप सिंह, परवेज अंसारी, प्रदीप यादव, राकेश यादव, लालजी केवट, मनीष साहनी, बहादुर चौहान, दीनानाथ केवट, प्रिंस उर्फ प्रतीक, सलीम, मिथुन पासवान, सुजीत पासवान, सन्नी सिंह, सिंहासन यादव, अविनाश तिवारी, सिंटू राव, अंशुमान चंद, सुभाष शर्मा के नाम शामिल हैं।

केस एक

 सहजनवां थाने के हिस्ट्रीशीटर प्रिंस उर्फ प्रतीक पांडेय को पुलिस ने मुठभेड़ में खोराबार के रामनगर कड़जहां के पास से गिरफ्तार किया था। उसके पैर में गोली लगी थी। वह जेल में बंद है। प्रिंस के खिलाफ, गोरखपुर के अलावा संतकबीरनगर, बस्ती, देवरिया जिले में रंगदारी वसूलने, लूट और हत्या की कोशिश जैैसे 23 मुकदमे दर्ज हैं।

केस दो

गीडा पुलिस ने जिले के टॉप 10 बदमाशों की सूची में शामिल माफिया प्रदीप सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। गीडा थाने के हिस्ट्रीशीटर पर हत्या, लूट, डकैती जैसे 54 मुकदमे दर्ज हैं। यह वही प्रदीप सिंह है, जिस पर गवाह की हत्या का आरोप है।  

केस तीन

90 के दशक में अपराध का पर्याय बने श्रीप्रकाश शुक्ला के साथी सत्यव्रत राय को पुलिस ने जेल भेजा था। गोरखपुर के टॉप 10 बदमाशों की सूची में सत्यव्रत राय का नाम सबसे ऊपर है। सिंचाई कॉलोनी निवासी सत्यव्रत राय कैंट थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उस पर 16 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या, लूट जैसेे कई मामले शामिल हैं।

केस चार

गुलरिहा थाने के हिस्ट्रीशीटर माफिया राकेश यादव पर 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। एक समय विधायक रहे ओमप्रकाश पासवान की बम मारकर हत्या की गई थी। राकेश यादव उस केस में मुख्य आरोपी था, लेकिन बाद में सबूतों के अभाव में वह बरी हो गया था। पुलिस ने मुठभेड़ के बाद राकेश के चार साथियों को पकड़ा था, फिर इसे जेल भेजा गया।

एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि लंबे समय बाद 125 हिस्ट्रीशीटर जेल में बंद हैं। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। हिस्ट्रीशीटर समेत अन्य बदमाशों की निगरानी चल रही है। पुलिस लगातार पैरवी कर कोशिश करती है कि बदमाश जमानत पर रिहा ना होने पाएं। जमानत पर बाहर आए हिस्ट्रीशीटरों के आपराधिक गतिविधियों की जांच की जा रही है। कई और हिस्ट्रीशीटर जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे।
 
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