100 एकड़ जमीन का देना होगा कब्जा
फोरलेन निर्माण के लिए 121 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। उसमें से 100 हेक्टेयर जमीन पर विभाग को कब्जा मिलने के बाद ठेकेदार निर्माण कार्य शुरू कराएगा। इस जमीन पर गाड़े गए बिजली के पोलो को भी हटाना होगा। इसके अलावा इस जमीन पर लगे पेड़ों को भी काटना होगा।
वन विभाग से एनओसी लेनी होगी। सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब सड़क निर्माणा कराने वाली फर्म को पूरी जमीन का 80 प्रतिशत कब्जा मिलने के बाद कार्य शुरू किया जाएगा।
एनएचएआई कराता है थ्रीडी
एनएचएआई जमीन का अधिग्रहण नहीं थ्रीडी कराता है। इसमें यह देखा जाता है कि किस कास्तकार की कितनी जमीन जा रही है। उसका सत्यापन किया जाता है। उसके बाद समाचार पत्रों में उसे प्रकाशित किया जाएगा। किस जमीन का कितना रेट है उसका जिक्र किया जाएगा। जमीन मालिक का नाम और उसका गाटा संख्या लिखा होगा। पूरी तरह से मिलान करने के बाद जमीन मालिक को मुआवजा दिया जाएगा। यह सब शुरू होने में अभी समय लगेगा।
एनएचएआई परियोजना प्रबंधक सीएम द्विवेदी ने कहा कि जंगल कौड़िकया- सोनौली फोरलेन के लिए अभी जमीन मिली नही है। टेंडर बगैर जमीन के भी किया जा सकता है। इसलिए किया गया है। चुनाव होने वाला है। आचार संहिता लगने वाली है। आचार संहिता लगने के बाद टेंडर नहीं हो पाता। टेंडर के बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया छह महीने बाद ही शुरू हो पाएगी। इस बीच अन्य औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी।