गोरखपुर में 45.77 हेक्टेयर यानी 113 एकड़ जमीन जीडीए के नाम आखिरकार दर्ज हो गई। अधिग्रहण के एक दशक से अधिक समय बाद भी नामांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने की वजह से 70.34 हेक्टेयर जमीन राजस्व अभिलेखों में जीडीए के नाम नहीं दर्ज हो सकी थी। अभिलेखों पर अभी भी काश्तकारों का ही नाम चला आ रहा था। इसका लाभ उठाकर कई काश्तकार और भू-माफिया इन जमीनों को दोबारा बेच दे रहे थे। इससे जीडीए की तो मुश्किलें बढ़ ही रही थीं, जमीन लेने वाले तमाम लोगों की गाढ़ी कमाई फंस जा रही थी। जीडीए इसके लिए विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय को दोषी ठहरा रहा था तो विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय तहसील को।
प्राधिकरण के मुताबिक विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी की ओर से नामांतरण के लिए 47.96 हेक्टेयर जमीन के प्रपत्र तहसील को भेजे गए थे। इसमें से गुरुवार तक 45.77 हेक्टेयर जमीन पर जीडीए का नाम दर्ज हो चुका है। रुस्तमपुर की 2.19 हेक्टेयर के साथ ही करीब 23 हेक्टेयर जमीन अब भी जीडीए के नाम दर्ज नहीं हो सकी है। इसमें 14.26 हेक्टेयर जमीन विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय से अमलदरामद के लिए नहीं भेजा गया है। जंगल सिकरी उर्फ खोराबार की 8.15 हेक्टेयर जमीन के प्रपत्र भी तैयार किए जा रहे हैं।
जीडीए के नाम जमीन नहीं दर्ज होने की जानकारी होने पर जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने मामले को कमिश्नर और डीएम के संज्ञान में लाते हुए, जमीन पर जीडीए का नाम दर्ज करवाने का अनुरोध किया था। कमिश्नर और डीएम ने सदर तहसील को नोडल नियुक्त करते हुए, अपनी देखरेख पूरी जमीन जीडीए के नाम दर्ज करने के लिए जल्द नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया था। डीएम खुद भी इसकी नियमित मॉनीटरिंग कर रहे हैं।
आवेदन के तीसरे दिन मानचित्र स्वीकृत होने से सेवानिवृत्त बैंककर्मी अभिभूत
आवेदन के दूसरे ही दिन मानचित्र स्वीकृत होने से अभिभूत सेवानिवृत्त बैंककर्मी ने जीडीए उपाध्यक्ष को व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर धन्यवाद ज्ञापित किया है। बैंक से सेवानिवृत्त हुए राय बृजपत रे जीडीए की बदली कार्यप्रणाली से काफी गदगद हैं। तारामंडल क्षेत्र में उनके बेटे राय अंकित रे ने मानचित्र पास कराने के लिए जीडीए में आवेदन किया था। मानचित्र जमा करने के अगले ही दिन फीस जमा करने का संदेश आया और उसके अगले ही दिन मानचित्र भी स्वीकृत हो गया। बृजपत कहते हैं कि किसी भी सरकारी कार्यालय में इस तरह की व्यवस्था उन्होंने पहली बार देखी है। उन्होंने कहा कि कभी इसी जीडीए के चक्कर में पड़कर उन्हें काफी परेशान होना पड़ा था।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने बताया कि जीडीए की ओर से अधिग्रहीत की गई जमीन में से 45.77 हेक्टेयर पर प्राधिकरण का नाम दर्ज हो गया है। बाकी जमीन पर भी जल्द ही नाम दर्ज हो जाएगा। प्रशासन के सहयोग से प्राधिकरण की जमीन पूरी तरह सुरक्षित हो गई।