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युवा दिखने के लिए अब बिना सर्जरी के फेस लिफ्टिंग

Tue, 05 Feb 2013 09:59 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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कम उम्र में ही चेहरे पर झुर्रियां आने लगीं या बढ़ी उम्र के प्रभावों को कुछ और दिन रोकना चाहते हैं, एंटी एजिंग की आपकी जरूरतों को देखते हुए अब हमारे देश में भी फेस लिफ्टिंग का चलन बढ़ रहा है। चेहरे की त्वचा में बदलाव कर चेहरे की बनावट बदलने की क्रिया है फेस लिफ्ट जो अब बिना सर्जरी के भी संभव है।
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फोर्टिस अस्पताल के प्लास्टिक और कॉस्मेटिक चीफ सर्जन डॉ. अजय कश्यप द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर एक नजर डालें नॉन सर्जिकल केएएस फेस लिफ्ट की प्रक्रिया पर, जो आज फेस लिफ्टिंग सर्जरी या कॉस्मेटिक सर्जरी का पर्याय बनती जा रही है।

क्या है केएएस फ्लूएड फेस लिफ्ट
केएएस फ्लूएड फेसलिफ्ट एक नॉन सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के ही टिशु का उपयोग करते हुए उसका चेहरे की बनावट में बदलाव किए जाते हैं। मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है जिसमें त्वचा को बिना सर्जरी के स्वस्थ बनाने के साथ-साथ एजिंग की निशानियों को खत्म किया जाता है। यह त्वचा के उन स्थानों में वाल्यूम को बढ़ाने में मदद करती है, जहां पर त्वचा अपना वाल्यूम खो चुकी है।  
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कौन करवा सकता है
कोई भी व्यक्ति किसी भी उम्र में केएएस फ्लूड फेस लिफ्ट करवा सकता है। जो लोग कम उम्र में ही अपनी त्वचा की रौनक खो देते हैं या अधिक उम्रदराज हैं उके लिए भी यह प्रक्रिया सुरक्षित है और जो लोग अधिक उम्र में भी अपनी त्वचा के खोए हुए वॉल्यूम को लौटाना चाहते हैं उनपर भी फेस लिफ्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी 20 से लेकर 60 तक की उम्र के लोगों के लिए यह कारगर है।  

जरूरत के हिसाब से होता है फेस लिफ्ट
इसमें सबसे पहले चेहरे का मूल्यांकन किया जाता है और तीन तरह के विभिन्न क्षेत्रों को चिह्नित किया जाता है:
1. वे स्थान जहां से वॉल्यूम को हटाना है, जैसे ठुडडी और गाल के नीचले हिस्से।
2. वे स्थान जहां वाल्यूम को बढ़ाना है जैसे गालों का ऊपरी हिस्सा, माथा या कोई भी स्थान जो खोखला दिखाई देता है।
3. वे स्थान जहां न तो वॉल्यूम बहुत ज्यादा है और न ही कम लेकिन त्वचा को जवां बनाने की आवश्यकता है।

ऐसे होता है फेस लिफ्ट
सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता का प्लेटलेट रिच प्लाजमा प्राप्त किया जाता है। रोगी का अपना ही खून उतनी ही मात्रा में लिया जाता है, जितना कि आमतौर पर रक्त जांच के लिए निकाला जाता है। एक एफडीए अनुमोदित विधी से पीआरपी को आइसोलेट किया जाता है। एक खास तकनीक क्लॉटिंग सेल्स यानि प्लेटलेट्स को बढ़ा देती है, जिसमें बड़ी मात्रा में ग्रोथ फैक्टर होते हैं। इससे शरीर और अधिक टिशु के निर्माण के लिए फिट हो जाता है।

इससे टिशु में कोलेजन की मात्रा भी बढ़ जाती है। यह एक बहुत ही विशिष्टीकृत तकनीक है जिसके लिए विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। यदि तैयारी की प्रक्रिया में लापरवाही बरती जाए या इसे ठीक तरह से न किया जाए तो गलत तरीके से परिणाम भी अप्रत्याशित हो जाते हैं।

चेहरे के मूल्यांकन के समय एक फेशियल मैप तैयार किया जाता है और आवश्यक वॉल्यूम का अनुमान लगाया जाता है। इन्हीं योजनाओं के आधार पर वॉल्यूम तैयार किया जाता है। दो प्रकार के फ्लूड मिक्सचर बनाए जाते हैं। पहला मिक्सचर सघन होता है जिसमें स्टेम सेल्स और एडिपोसार्इटस अधिक संख्या में होती हैं। दूसरे मिक्सचर में पीआरपी अधिक मात्रा में होता है। फैट की अल्प मात्रा को निकाल कर फेशियल फैट के स्थानों का उपचार किया जाता है। जिन स्थानों में वॉल्यूम की कमी होती है, पहले बनाए जा चुके मैप के आधार पर उनकी फिलिंग की जाती है।

यह त्वचा में युवा अपरिपक्व कोशिकाओं का निर्माण बढ़ाता है। इससे त्वचा में कोलेजन का निर्माण होने लगता है और त्वचा जवां और कोमल हो जाती है। गालों और नाक के आसपास के खाली स्थानों की फिलिंग कर दी जाती है और त्वचा की चमक लौट आती है।

ये है नफा-नुकसान
इसमें व्यावहारिक रूप से ज्यादा समय नहीं लगता, अगले कुछ महीनों तक रोगी की त्वचा लगातार बेहतर होती जाती है। चूंकि इसमें कोई कृत्रिम फिलर्स प्रयुक्त नहीं किए जाते इसलिए त्वचा में किसी तरह की गांठें या असमानता नहीं हो सकतीं। इसमें आपकी अपनी त्वचा से टिशु लिए जाते हैं इसलिए किसी भी तरह के रिजेक्शन या रिएक्शन की कोई आशंका नहीं होती।
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इस प्रक्रिया में कोई कट या चीरा नहीं लगाया जाता। कभी कभी हल्की सी सूजन या मामूली से रैशेज जैसे साइड एफेक्ट दिखाई दे सकते हैं।

लागत
फिलहाल इस प्रक्रिया की लागत 50,000 से 80,000 रुपए तक आती है।
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