कान फिल्म फेस्टिवल चल रहा है। शुक्रवार को फेस्टिवल में बॉलीवुड फिल्म 'मंथन' की स्क्रीनिंग हुई। इसमें नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और स्मिता पाटिल के बेटे प्रतीक बब्बर शामिल होने पहुंचे।
शुक्रवार को नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक और प्रतीक बब्बर, कान फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर नजर आए। इनके अलावा फेस्टिवल में भारत में श्वेत क्रांति के जनक रहे डॉ. वर्गीज कुरियन की बेटी निर्मला निर्मला कुरियन व अमूल के एमडी भी रेड कार्पेट पर नजर आए।
दुग्ध सहकारी आंदोलन से प्रेरित फिल्म
रेड कार्पेट की तस्वीरें अमूल इंडिया के इंस्टाग्राम हैंडल से साझा की गई हैं। फिल्म 'मंथन' 1976 में आई। इसका निर्देशन श्याम बेनेगल ने किया था। क्लासिक फिल्म को शुक्रवार को सैले बुनुएल में एक प्रतिष्ठित समारोह में प्रदर्शित किया गया। 'मंथन' वर्गीज कुरियन के अग्रणी दुग्ध सहकारी आंदोलन से प्रेरित हिंदी फिल्म है। इसकी कहानी को श्याम बेनेगल और विजय तेंदुलकर ने मिलकर लिखा है।
ये सितारे आए थे नजर
इस फिल्म में दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल नजर आई थीं। यह इकलौती ऐसी फिल्म है, जो इस साल कान फिल्म फेस्टिवल के क्लासिक सेक्शन में चुनी गई। इस फिल्म में स्मिता पाटिल और नसीरुद्दीन शाह के अलावा, गिरीश कर्नाड, कुलभूषण खरबंदा, मोहन अगाशे, अनंत नाग और अमरीश पुरी भी थे।
क्राउड फंडिंग से किया गया था निर्माण
यह पहली ऐसी भारतीय फिल्म थी, जिसे क्राउड फंडिंग से बनाया गया। इसे पूरी तरह से 500,000 किसानों द्वारा क्राउडफंड किया गया था, जिन्होंने दो-दो रुपए का योगदान करके इतना फंड जुटाया था। 'मंथन' को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की ओर से 'बेस्ट फीचर फिल्म' और 'बेस्ट स्क्रिनप्ले' का अवॉर्ड भी मिला। 'मंथन' 1976 के अकादमी पुरस्कारों के लिए सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में भारत की तरफ से आधिकारिक प्रविष्टि भी थी। कान में फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर श्याम बेनेगल ने कहा था, 'यह फिल्म मेरे दिल के काफी करीब है क्योंकि 500,000 किसानों ने इसमें फंड किया था और इसने एक असाधारण सहकारी आंदोलन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसका उद्देश्य आर्थिक असमानता और जातिगत भेदभाव की बेड़ियों को तोड़ना था'।
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