फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जय होः अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता

विज्ञापन
विज्ञापन
लगता है सलमान खान ने अपने आपको ऐक्टर से ज्यादा सोशल वर्कर मानना शुरू कर दिया है। अपनी संस्था बीइंग ह्यूमन के सहारे तो वह समाज कल्याण में योगदान दे ही रहे हैं, अब फिल्म के रास्ते भी उन्होंने सुधार का जोखिम उठा लिया है।
विज्ञापन


उन्हें लगता है कि वह जगाएंगे तो जनता जागेगी! ‘जय हो’ के ड्रामे का आम आदमी पर क्रांतिकारी असर पड़ेगा और वह अपने हालात बदलने के लिए सड़क पर उतर सिस्टम से टकरा जाएगा!

वैसे आश्चर्य की बात है कि इन्हीं सलमान और उनकी टीम से जब कहा जाता है कि आपकी फिल्म में ‘फेवीकोल’ जैसे गाने समाज पर बुरा असर डालते हैं तो वे मानने से इंकार करते हैं। डबल स्टैंडर्ड ना...!!
विज्ञापन

 

सलमान के स्टारडम को भुनाने की कोशिश

फिल्म के शुरुआती सीन में ही सलमान दर्जन भर गुंडों को पीटते हैं। एक से पूछा जाता है कि पिताजी क्या करते हैं? जवाब मिलता है, बहुत पावरफुल आदमी हैं। नेता हैं। फिर सवाल होता है कि उनसे क्या सीखा? जवाब आता है, अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता।

टिकट खिड़की पर कामयाबी की कहानी का एक सूत्र यह भी है। वास्तव में पूरा खेल सलमान की छवि को बॉक्स ऑफिस पर भुनाने का है। लेकिन मुश्किल यह है कि सलमान की बीते कुछ वर्षों की सफलता में कॉमेडी और अच्छे संगीत का बड़ा हाथ रहा है।

जबकि ‘जय हो’ में ये दोनों गायब हैं। अगर निर्देशक सोहेल खान को वाकई लगता है कि समाज में बदलाव की सुगबुगाहट है, तो वह फिल्म में कहीं नहीं दिखती। समाज के चरित्र को रेखांकित करता एक संवाद जरूर मिलता हैः जनता तो जब उसकी बत्ती लगती है तब केवल मोमबत्ती उठाने का काम करती है!

फ्लाप टीम के साथ हिट फिल्म

सलमान सुपरसितारे हैं, इसमें दो राय नहीं। लेकिन फिल्म में उन्होंने अपने साथ ऐसे लोगों की भीड़ इकट्ठा कर रखी है जिन्हें दर्शक वर्षों पहले टिकट खिड़की की दौड़ से बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं।

सुनील शेट्टी, आदित्य पंचोली, महेश मांजरेकर, मोहनीश बहल, वत्सल सेठ, अश्मित पटेल, जेनिलिया डिसूजा, ट्यूलिप जोशी, नौहीद सायरसी वगैरह वगैरह। इन चेहरों को देखते हुए आपको सोच में पड़ जाते हैं कि क्या बीते जमाने की कोई फिल्म देख रहे हैं!

तब्बू और डैनी जैसे पुराने अच्छे ऐक्टर भी हैं, लेकिन उनके रोल स्क्रिप्ट में बड़े साधारण हैं। जिन्हें आप एक जमाने से देखते आ रहे हैं। रोती हुई बहन और सिस्टम को कुछ नहीं समझने वाला नेता। निःसंदेह निर्देशक ने एक फ्लॉप टीम के साथ हिट फिल्म बनाने की कोशिश की है।
 

देखे हुए से कैसे नजर फेरे कोई

फिल्म में सलमान खान के किरदार जय में चुन चुन कर अच्छाई दिखाई गई है। इतनी अच्छाई कि दर्शक को अपने आप पर शर्म आने लगती है, मैं ऐसा क्यों हूं? जय का दिल मक्खन से ज्यादा मुलायम और मुक्के फौलाद से फौलादी हैं।

जब जय परेशान होता है कि सारी दिल दहलाने वाली बातें, सारा अन्याय उसे ही क्यों नजर आता है। बाकी लोगों को क्यों नहीं। तब उसकी बहन गीता (तब्बू) समझाती है कि दिखाई सबको देता है, लेकिन लोग नजरें फेर लेते हैं।

जय सेना का एक पूर्व अफसर है, जिसे इस बात के लिए निकाल दिया गया कि उसने आतंकवादियों से लड़ाई में अपने वरिष्ठों का आदेश नहीं माना। घर लौटे जय की अपने शहर के नेता दशरथ सिंह (डैनी), उसके दामाद और बेटी से ठन से जाती है। वे लोग जय को बर्बाद करने के लिए उसके परिवार को ठिकाने लगाना चाहते हैं, परंतु यह काम क्या मुमकिन है?

छोरा गांडो थई गयो...!

सलमान अकेले दम पर फिल्म खींच सकते हैं। शूटिंग शुरू होने से पहले उन्हें यह मालूम था और यह बॉक्स ऑफिस का सच भी है। इस फिल्म में उनके अलावा और कोई देखने जैसा नहीं है। हीरोइन, डेजी शाह भी नहीं।

लेकिन समस्या यह है कि बीते कुछ वर्षों में जिस सलमान को लोगों ने सिर आंखों पर बैठाया, वह ऐक्शन के साथ कॉमेडी भी करता है। अच्छे गाने भी गाता है। जबकि यहां सलमान बहुत गंभीर हैं।

रिंकी उर्फ पिंकी उर्फ हीरोइन के पिंक अंडरवीयर को लेकर बार-बार दोहराई जाने वाली एक कॉमेडी के सिवा यहां कुछ भी मुस्कराने के लिए नहीं है। जबकि कई लोगों को यह जोक भी अपसेट कर सकता है!

एक अन्य दृश्य में गुजराती संवाद के सहारे गुदगुदाने की कोशिश हैः छोरा गांडो थई गयो... यानी लड़का पागल हो गया है। गुजराती में गांडा का मतलब होता है पागल। फिल्म में बताया गया है कि पगली यानी होता है गांडी।
 
विज्ञापन

बाकी सब ‘फस्स क्लास’ है

इन तमाम बातों के अलावा फिल्म में बाकी सब ‘फस्स क्लास’ है। जो सलमान खान के फैन हैं, उन्हें कहानी से कोई मतलब नहीं। उन्हें फिल्म देखने में सौ फीसदी मजा आएगा जब हीरो उछल-उछल कर अकेला पचास-पचास लोगों की पीटेगा।

उनके हाथ-पैर-गर्दन तोड़ देगा। उन्हें अपने पैरों से मसल कर रख देगा। सलमान के इस डायलॉग पर वे जोर-जोर से ताली पीट सकेंगे कि आम आदमी सोता हुआ शेर है... उंगली मत कर... नहीं तो चीर-फाड़ देगा। उन्हें मजा आएगा जब फिल्म अंत के करीब होगी और ऐक्शन सीन में सलमान अपना शर्ट फाड़ कर कसरती बॉडी दिखाएंगे।

स्लो मोशन में विलेन धूल-धूसरित और रक्तरंजित होगा। हां, सलमान ने इस फिल्म में एक सीख बार-बार दी है कि कोई आपके साथ भलाई करे तो थैंक यू ना कहें। बल्कि तीन और लोगों की भलाई करने की कसम खाएं। बात अच्छी है। लेकिन इस फिल्म को देख कर तीन लोगों से देखने को कहने से पहले आप दो बार सोचेंगे जरूर। जय हो।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें