कंधार प्लेन हाईजैक की घटना पर बनी वेब सीरीज 'आईसी 814 द कंधार हाइजैक' 29 अगस्त से स्ट्रीम होगी। इस दहशत भरी कहानी का एक किस्सा ऐसा है, जिसके बारे में अभी तक लोगों को कुछ और ही पता है। कंधार आने से पहले लाहौर में विमान में ईंधन भरा गया था। लोगों को ये पता है कि कैप्टन देवी शरण, सह-पायलट राजिंदर कुमार और फ्लाइट इंजीनियर एके जगिया ने पाकिस्तानी अधिकारियों के फैसले को अनसुना करके विमान को लाहौर एयरपोर्ट पर उतारा था, लेकिन असल कहानी का राज तो देवी शरण ने खोला है।
पांच आतंकवादियों ने किया था हाईजैक
कैप्टन देवी शरण ने आईसी 814 के इस लाहौर चैप्टर में क्या कुछ किया था उसे तो हम जानेंगे ही, लेकिन उससे पहले एक बार इस हाईजैक की घटना पर सरसरी नजर डाल लेते हैं। 1999 के दिसंबर की हाड़ कपां देने वाली सर्दी में आईसी-814 ने पड़ोसी देश काठमांडू से उड़ान भरी थी। समय था शाम चार बजे का और फ्लाइट को आसमान में उड़ान भरे अभी 40 मिनट ही हुए थे कि पांच आतंकवादियों ने इसे हाईजैक कर लिया। ये आठ दिन तक आतंकवादियों के कब्जे में रहा था और इसमें करीब 180 लोग सवार थे। नया साल आने से एक दिन पहले यानी 31 दिसंबर को यात्रियों को रिहा किया गया था।
देवी शरण ने योजना बनाई, लेकिन सह-पायलट को नहीं बताया
आईसी-814 को जब हाईजैक किया गया था, तब देवी शरण की उम्र 37 साल थी। उनके मुताबिक लाहौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल की ओर से विमान को उतारने की अनुमति नहीं दी गई थी। उस वक्त देवी शरण ने अपने दिमाग में एक योजना बनाई थी, जिसके बारे में उनके सह-पायलट समेत अन्य लोगों को भी नहीं पता था। दरअसल, इसकी वजह ये थी कि विमान के कॉकपिट में भी दो आंतकवादियों ने डेरा जमा रखा था। पायलट आपस में जो कुछ भी कहते, उसे वो सुन लेते थे। बस इसी के चलते शरण ने चालाकी से काम लिया।
देवी शरण ने किया था क्रैश लैंड का नाटक
कैप्टन देवी शरण ने पीटीआई से किस्सा साझा करते हुए बताया था कि उनका प्लान ये था कि आतंकवादियों के सामने विमान के क्रैश लैंड होने का ढोंग किया जाए। इसका फायदा ये होता कि वो लाहौर एयरपोर्ट पर बंद पड़ी रनवे की लाइट को चालू करने और प्लेन को वहां उतारने की अनुमति मिलने का दबाव बनाने की कोशिश करते। मालूम हो कि लाहौर हवाई अड्डे पर विमान को उतरने की अनुमति नहीं मिली थी और साथ ही साथ रनवे और हवाई अड्डे की बत्ती भी बुझा दी गई थी।
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काम आ गई कैप्टन की चालाकी
शरण की ये चालाकी काम कर गई थी और इसमें प्लेन में लगे एक उपकरण की भी खास भूमिका रही, जिसे 'ट्रांसपोंडर' नाम से जाना जाता हैं। शरण के अनुसार, ट्रांसपोंडर के जरिए एटीसी को लोकेशन की जानकारी मिलती रहती है और जब शरण क्रैश लैंड का नाटक कर रहे थे तो इसी उपकरण से एटीसी वाले हरकत में आए थे और आनन-फानन में वहां से सूचना दी गई कि रनवे खुला है। बस फिर क्या था, पायलट ने सुरक्षित ढंग से प्लेन को लैंड करा दिया था।
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