रोहित शेट्टी की ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइची 'सिंघम' इन दिनों अपनी तीसरी किस्त 'सिंघम अगेन' को लेकर सुर्खियों में है। कॉप यूनिवर्स पर आधारित इस मूवी में अजय देवगन मुख्य भूमिका में नजर आने वाले हैं। वहीं, बीते दिन फिल्म से जुड़े सितारों ने दो तस्वीरें साझा कर शूटिंग के शुभआरंभ होने की खुशखबरी दी। इसके बाद से ही फैंस इससे जुड़े हर एक अपडेट पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। हालांकि, 'सिंघम' फ्रेंचाइजी को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने चौंकाने वाली बात कह दी है। न्यायमूर्ति ने फिल्म के जरिए लोगों को हानिकारक संदेश भेजे जाने का आरोप लगाया है।
बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने शुक्रवार को कहा कि कानून की उचित प्रक्रिया की परवाह किए बिना त्वरित न्याय देने वाले एक 'हीरो कॉप' की सिनेमाई छवि, जैसा कि 'सिंघम' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में दिखाया गया है, एक बहुत ही हानिकारक संदेश भेजती है। भारतीय पुलिस फाउंडेशन द्वारा अपने वार्षिक दिवस और पुलिस सुधार दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में बोलते हुए, उन्होंने कानून की प्रक्रिया के प्रति लोगों की व्यग्रता पर भी सवाल उठाया। गौतम पटेल ने कहा कि पुलिस की छवि दबंग, भ्रष्ट और गैर-जिम्मेदार की है। साथ ही न्यायाधीशों, नेताओं और पत्रकारों सहित अन्य के बारे में भी यही कहा जा सकता है।
न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने कहा कि जब जनता सोचती है कि अदालतें अपना काम नहीं कर रही हैं, तो पुलिस के कदम उठाने पर वह जश्न मनाती है। उन्होंने कहा, 'यही कारण है कि जब बलात्कार का एक आरोपी कथित तौर पर भागने की कोशिश करते समय मुठभेड़ में मारा जाता है, तो लोग सोचते हैं कि यह न सिर्फ ठीक है, बल्कि इसका जश्न मनाया जाता है। उन्हें लगता है कि न्याय मिल गया है, लेकिन क्या यह मिला?'
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न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, 'सिंघम फिल्म में विशेष रूप से उसके क्लाइमेक्स में दिखाया गया है कि पूरा पुलिस बल प्रकाश राज अभिनीत नेता पर टूट पड़ता है। साथ ही दिखाया गया है कि अब न्याय मिल गया है, लेकिन मैं पूछता हूं, क्या मिल गया।हमें सोचना चाहिए वह संदेश कितना खतरनाक है।' पटेल ने साफ किया कि अगर इस प्रक्रिया को शॉर्टकट के पक्ष में छोड़ दिया गया तो हम कानून के शासन को खत्म कर देंगे।