अभिनेता ने आगे कहा कि ऐसा नहीं था कि काम उनके पास नहीं आया, लेकिन वह सार्थक नहीं थे। अत: वह अपना कमाया हुआ स्वाभिमान और सम्मान खोना नहीं चाहता थे, इसलिए वह प्रोडक्शन में आ गए, क्योंकि उन्हें अपना घर चलाना था और अपने परिवार का भरण-पोषण करना था। उन्हें प्रोडक्शन पसंद था और उन्होंने ऐसा किया, लेकिन उस समय वह ऐसा कुछ भी साइन नहीं करना चाहते थे, जिसके लिए उन्हें बाद में पछताना पड़े। संजय ने कहा कि उन्होंने ऐसी फिल्में की हैं, जो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाईं, लेकिन उन्हें उनमें से किसी को भी करने का अफसोस नहीं है।
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संजय का कहना है कि उनके पास लोगों के लिए प्रेरणा के कुछ शब्द हैं। वह कहते हैं कि जब बाधाएं आती हैं, तो व्यक्ति को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और उन्होंने यही किया। संजय की बेटी शनाया कपूर जल्द ही डेब्यू करने वाली हैं। उनके बारे में बात करते हुए संजय ने कहा कि जब से उन्होंने उनकी यात्रा देखी है और उन्होंने खुद को कैसे संचालित किया है, उन्होंने उनकी बुद्धिमत्ता को आत्मसात कर लिया है। संजय ने कहा कि शनाया समझ गई हैं कि इंडस्ट्री कैसी है और यह किस तरह की कठिनाइयों, फोकस और समर्पण की मांग करती है। शनाया की पहली फिल्म का नाम 'बेधड़क' है। शशांक खेतान के निर्देशन में बनी इस फिल्म में गुरफतेह पीरजादा और लक्ष्य लालवानी भी हैं।
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