हिंदी फिल्मों में देशप्रेम को हर दौर में भुनाया गया है। अलग-अलग समय पर अलग-अलग नायक देशप्रेम की इस भावना का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। 70 के दशक में मनोज कुमार देशभक्ति की फिल्मों के इतने बड़े चेहरे रहे हैं कि उन्हें भारत कुमार के नाम से जाना जाने लगा।
मनोज कुमार ने देशभक्ति की कई फिल्मों में न सिर्फ अभिनय किया बल्कि वह बतौर प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी ऐसी फिल्में बनाते रहें। पूरब पश्चिम, उपकार और क्रांति उनकी कुछ सुपरहिट फिल्में रहीं।
देशभक्ति की फिल्मों के डायलॉग ही इनकी जान होते थे। एक अदृश्य दुश्मन को ललकारने वाले डायलॉग हर दौर में दर्शकों को भाए हैं। 90 के बाद की फिल्मों में सनी देओल बड़े देशभक्त नायक के रूप में उभरे। आइए नजर डालते हैं हाल ही की फिल्मों के देशभक्ति के डायलॉग पर
*'मैं अपने मुल्क को अपनी मां मानता हूं। और अपनी मां को बचाने के लिए मुझे किसी की जरूरत नहीं: आमिर खान, सरफरोश फिल्म में
*'दूध मांगोगे तो खीर देंगे कश्मीर मांगोगे तो चीर देंगे': सनी देओल, मां तुझे सलाम में
*'मैं अपने वतन को अपनी मां मानता हूं। और जब कोई दरिंदा मेरी मां की इज्जत लूटे तो उसे रोकने के लिए मुझे किसी की परमिशन की जरूरत नहीं': सनी देओल, इंडियन फिल्म में
*'अगर वे कहते हैं कि वे नाश्ता जैसलमेर में करेंगे और डिनर दिल्ली में तो मैं हम कहते हैं कि हम नाश्ता भी कराची में करेंगे और लंच भी': सनी देओल, बार्डर में
*'बहरों को सुनाने के लिए बम फोड़ने की जररूत होती है। और ये अंग्रेज सरकार गूंगी होने के साथ बहरी भी हो गई है': अजय देवगन, 23 मार्च 1931 शहीद में