आशिक अबू का बड़ा दावा
आशिक अबू के इस्तीफे पत्र में लिखा है, 'मैं 2009 में एफईएफकेए का सदस्य बन गया और बाद में इसकी कार्यकारी समिति के लिए चुना गया। मेरी ओर से कई प्रयासों के बावजूद, जब मुझे निर्माता के साथ मौद्रिक मुद्दों का सामना करना पड़ा तो महासंघ ने हस्तक्षेप नहीं किया। मुझे निर्माता से दावा की गई राशि का केवल आधा हिस्सा मिला। इसमें भी एसोसिएशन ने कमीशन के रूप में राशि का 20 प्रतिशत मांगा। मुझे एक दिन एफईएफकेए कार्यालय से राशि की मांग करते हुए तीन फोन कॉल आए।'
एसोसिएशन की खोली पोलपट्टी
संघ की प्रतिक्रिया से हैं नाराज
पत्र में उन्होंने महसूस किया कि हेमा समिति की रिपोर्ट पर संघ की प्रतिक्रिया ने एक सदस्य के रूप में उन्हें निराश किया है। इससे पहले आशिक अबू ने एसोसिएशन नेता बी उन्नीकृष्णन के नेतृत्व की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था, 'मुझे एफईएफकेए से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन बी उन्नीकृष्णन के नेतृत्व में एसोसिएशन को जिस तरह से चलाया जा रहा है, उससे मैं पूरी तरह असहमत हूं। सरकार को उनके पाखंडी रुख को पहचानना चाहिए और उन्हें नीति पैनल से हटा देना चाहिए।'
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संघ ने की थी रिपोर्ट की मांग
एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ केरल (एफईएफकेए) ने पहले मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में दुर्व्यवहार करने वालों के नाम जारी करने की मांग की थी। संघ ने हेमा आयोग की रिपोर्ट की सराहना की और कहा कि यदि उनके सदस्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई तो वे आवश्यक कार्रवाई भी करेंगे।