आज भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक-स्क्रीनराइटर रहे कमाल अमरोही की पुण्यतिथि है। कमाल साहब में अपने नाम के ही अनुरूप कमाल की प्रतिभा थी। इंडस्ट्री को उन्होंने 'पाकीजा', 'महल' और 'रजिया सुल्तान' जैसी एक से बढ़कर एक फिल्म दीं। वहीं, हिंदी सिनेमा की सबसे भव्य फिल्म 'मुगल-ए-आजम' के डायलॉग लेखन में भी उनकी सहभागिता रही। बता दें कि कमाल अमरोही हिंदी और उर्दू के कवि भी थे। कमाल अमरोही की जिंदगी किसी फिल्म की कहानी सरीखी थी। उन्होंने बचपन में घर छोड़ा और फिर अपनी मंजिल खुद तलाश करके एक मुकाम हासिल किया। आइए जानते हैं कमाल अमरोही के बारे में...
कमाल अमरोही का असली नाम सैयद आमिर हैदर कमाल था। कमाल साहब का जन्म 17 जनवरी 1918 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा में हुआ। बचपन में कमाल काफी शरारती हुआ करते थे। एक दिन उनकी शरारत से तंग आकर उनके बड़े भाई ने उनके एक चांटा मार दिया। गाल पर पड़ा थप्पड़ कमाल अमरोही के दिल पर जा लगा और उन्होंने गुस्से में घर छोड़ दिया। कमाल अमरोही छोटी उम्र में घर छोड़कर लाहौर चले गए। यहीं से उनके अंदर लेखन के प्रति दिलचस्पी जागनी शुरू हुई।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक लाहौर में रहते हुए कमाल अमरोही ने एक उर्दू अखबार में लिखना शुरू कर दिया। मगर, अखबार की नौकरी में उनका खास मन न लगा। वह लाहौर से निकलकर मुंबई आ गए। यहां उनकी मुलाकात सोहराब मोदी, कुंदरलाल सहगल और ख्वाजा अहमद अब्बास जैसे दिग्गजों से हुई। कमाल अमरोही को पता चला कि सोहराब मोदी को एक कहानी की तलाश है। उनकी कहानी पर आधारित फिल्म 'पुकार' (1939) सुपरहिट रही और इस तरह लेखन का सिलसिला चल पड़ा।
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वर्ष 1949 में कमाल अमरोही ने फिल्म 'महल' के जरिए निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। कमाल अमरोही ने अपने करियर में कुल जमा चार फिल्मों का निर्देशन किया। यह फिल्में थीं- महल, दायरा, पाकीजा और रजिया सुल्तान। 'पाकीजा' फिल्म कमाल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट था। 1958 में बनना शुरू हुई यह फिल्म 1971 में बनकर तैयार हुई। फिल्म की शुरुआत के वक्त मीना कुमारी कमाल अमरोही की पत्नी थीं, लेकिन दोनों के अलगाव के बाद यह फिल्म लटक गई। हालांकि, कमाल अमरोही ने हार नहीं मानी और आखिरकार मीना कुमारी को 'पाकीजा' पूरी करने के लिए राजी कर लिया। 'पाकीजा' को भारतीय सिनेमाई इतिहास की शानदार क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है। इतना ही नहीं उन्होंने के. आसिफ के निर्देशन में बनी कालजयी फिल्म 'मुगल-ए-आजम' के डायलॉग भी लिखे। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट डायलॉग का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। 11 फरवरी 1993 को कमाल अमरोही इस दुनिया को सदा के लिए छोड़ गए।
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